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निःशुल्क दवा योजना पर सख्ती: 7 फर्में डिबार

Health department officials announcing action against seven pharma firms

राजस्थान मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन की अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई

सीकर, मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा की पहल पर चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने निःशुल्क दवा योजना में गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए अभूतपूर्व कार्रवाई की है।
राजस्थान मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन (RMSC) ने इस वर्ष 7 फर्मों और 40 दवाइयों को डिबार कर दिया है। यह कदम निगम के गठन से अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है।


“गुणवत्ता पर कोई समझौता नहीं” – चिकित्सा मंत्री

चिकित्सा मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता आमजन तक गुणवत्तापूर्ण दवाएं उपलब्ध कराना है।
उन्होंने बताया—
“निगम द्वारा गुणवत्ता मानकों में खरा नहीं उतरने वाली फर्मों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई गई है। एक ही वर्ष में 7 फर्मों और 40 उत्पादों को प्रतिबंधित करना ऐतिहासिक कदम है।”


2011 से 2024 तक सिर्फ 26 फर्म, 2025 में ही 7

प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़ ने बताया कि 2011 से 2024 तक कुल 26 फर्में ही डिबार हुई थीं, जबकि 2025-26 के एक वर्ष में ही 7 कंपनियों को अमानक दवा आपूर्ति पर प्रतिबंधित कर दिया गया।

इसके साथ ही 6 मामलों में कंपनियों पर पेनल्टी भी लगाई गई है।


दवा जांच का फुल-प्रूफ सिस्टम

RMSC के प्रबंध निदेशक पुखराज सेन ने बताया कि दवाओं की सप्लाई से पहले प्रत्येक बैच की जांच अनिवार्य है।
दवाओं को पहले जिला औषधि भंडारों में क्वारंटाइन क्षेत्र में रखा जाता है और सिर्फ मानक पुष्टि होने पर ही ई-औषधि सॉफ्टवेयर के माध्यम से अस्पतालों को जारी किया जाता है।

उन्होंने कहा—
“अमानक दवा रोगी तक न पहुंचे, इसके लिए वैज्ञानिक और बहु-स्तरीय सिस्टम लागू किया गया है।”


प्रतिबंध की प्रक्रिया कैसे होती है?

  • दवा का सैंपल पहले अधिकृत लैब में भेजा जाता है
  • अमानक रिपोर्ट आने पर पुन: राजकीय प्रयोगशाला में परीक्षण
  • औषधि नियंत्रण अधिकारियों द्वारा रैंडम सैंपल
  • रिपोर्ट अमानक आने पर अनुशासनात्मक समिति सुनवाई करती है
  • फर्म को नोटिस भेजा जाता है
  • प्रमाणित दोषी पाए जाने पर डिबारमेंट या पेनल्टी की कार्रवाई

इस वर्ष डिबार की गई 7 फर्में

अमानक या मिलावटी दवाएं सप्लाई करने पर 5 फर्मों को 5 वर्ष के लिए प्रतिबंधित किया गया—

  • मेसर्स एरियन हेल्थकेयर
  • मेसर्स एग्रॉन रेमेडीज प्रा. लि.
  • मेसर्स एफी पेरेंटेरल्स
  • जेपीईई ड्रग्स
  • मेसर्स साई पेरेंटेरल्स लि.

सेवा शर्तों के उल्लंघन पर 2 फर्मों को 3 वर्ष का प्रतिबंध—

  • मेसर्स बायोजेनेटिक ड्रग्स प्रा. लि.
  • मेसर्स स्माइलैक्स हेल्थकेयर

इन 40 उत्पादों पर लगाया गया प्रतिबंध

गुणवत्ता जांच में असफल पाए जाने पर निम्न दवाइयों पर 1 वर्ष से 3 वर्ष तक का प्रतिबंध लगाया गया है:

  • प्राइमाक्वीन टैबलेट
  • हेपरिन सोडियम इंजेक्शन
  • कैल्शियम-विटामिन D3 सस्पेंशन
  • फेक्सोफेनाडाइन टैबलेट
  • लेवेटिरासिटम टैबलेट
  • क्लोपिडोग्रेल-एस्पिरिन टैबलेट
  • सेफिक्सिम टैबलेट
  • इट्राकोनाजोल कैप्सूल
  • पिरफेनीडोन टैबलेट
    …और अन्य कुल 40 उत्पाद।

विभाग का संदेश: “लोग निश्चिंत रहें”

अधिकारियों ने कहा कि यह कार्रवाई आमजन को सुरक्षित और मानक दवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से की गई है।
विभाग का कहना है कि—
“कोई भी अमानक दवा जनता तक नहीं पहुंचेगी।”