राजस्थान कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष गोविन्द सिंह डोटासरा ने राजस्थान और हरियाणा के बीच हुए यमुना जल समझौते (MoA) को लेकर राज्य सरकार पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर जारी अपने बयान में आरोप लगाया कि यह समझौता राजस्थान के अधिकारों के अनुरूप नहीं है और राज्य के हितों से समझौता किया गया है।
डोटासरा ने कहा कि राजस्थान किसी की दया का पात्र नहीं, बल्कि वर्ष 1994 के यमुना जल समझौते के तहत अपने हिस्से का पानी मांग रहा है। उन्होंने दावा किया कि राज्य को मिलने वाला पानी किसी की कृपा नहीं, बल्कि उसका वैधानिक अधिकार है।
समझौते की शर्तों पर उठाए कई सवाल
डोटासरा ने अपने बयान में कहा कि यदि नया MoA वर्ष 1994 के मूल समझौते के आधार पर किया गया है, तो राजस्थान के हिस्से के पानी पर नई शर्तें क्यों लगाई गईं।
उन्होंने दावा किया कि नए समझौते के तहत राजस्थान को केवल जुलाई से अक्टूबर तक चार महीने पानी मिलने का उल्लेख है। साथ ही उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि 1994 के समझौते में 1.19 बिलियन क्यूबिक मीटर जल आवंटन का प्रावधान था, जबकि नए समझौते में 580 एमसीएम पानी का जिक्र किया गया है।
इसके अलावा उन्होंने जल आवंटन, अधिशेष जल, पाइपलाइन से हरियाणा को प्राथमिकता, Pro Rata Basis व्यवस्था और केंद्रीय जल आयोग की भूमिका से जुड़े कई प्रश्न भी उठाए।
समझौते की प्रति सार्वजनिक करने की मांग
कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से यमुना जल समझौते (MoA) की पूरी प्रति सार्वजनिक करने की मांग की। उन्होंने कहा कि जल आवंटन, वित्तीय दायित्व, लागत साझेदारी, पानी छोड़ने के नियम और अन्य सभी शर्तें जनता के सामने रखी जानी चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार स्पष्ट करे कि यह समझौता राजस्थान के अधिकारों की रक्षा करता है या फिर राज्य के हितों से समझौता किया गया है।






