कृषि योजनाओं की प्रगति और उर्वरक निगरानी पर सख्त निर्देश जारी
सीकर, कृषि विभाग कार्यालय परिसर में स्थित आत्मा मीटिंग हॉल में अतिरिक्त निदेशक कृषि शिवजीराम कटारिया की अध्यक्षता में शुक्रवार को सीकर, झुंझुनूं, नागौर और डीडवाना-कुचामन के लिए खण्ड स्तरीय मासिक तकनीकी कार्यशाला आयोजित की गई।
कार्यशाला में कृषि एवं उद्यान विभाग की विभिन्न गतिविधियों की विस्तृत समीक्षा की गई। अधिकारियों ने अपने-अपने क्षेत्रों की प्रगति रिपोर्ट साझा की और किसानों से जुड़ी समस्याओं तथा उनके समाधान पर विस्तार से चर्चा की।
30 नवंबर तक योजनाओं का लक्ष्य पूरा करने के निर्देश
अतिरिक्त निदेशक कृषि ने स्पष्ट निर्देश दिए कि जिले को आवंटित सभी योजनाओं में 100 प्रतिशत प्रगति सुनिश्चित की जाए।
इन योजनाओं का उल्लेख किया गया—
- एनएफएसएम
- आरकेवीवाई
- आरएडी
- पीकेवीवाई
- फॉर्म पॉन्ड
- पाइपलाइन योजनाएं
उन्होंने कहा कि इन सभी योजनाओं में स्वीकृत बजट का उपयोग 30 नवंबर 2025 तक हर हाल में पूरा किया जाए।
यूरिया डायवर्जन रोकने पर सख्ती
कार्यशाला में अनुदानित यूरिया को औद्योगिक इकाइयों—जैसे सनमाइका, प्लाइवुड, रेज़िन, डेफ आदि—में उपयोग होने की संभावनाओं को देखते हुए इसकी रोकथाम के निर्देश जारी किए गए।
अतिरिक्त निदेशक ने कहा—
“यूरिया डायवर्जन रोकने के लिए समय-समय पर निरीक्षण किए जाएं और इसके लिए जिला स्तरीय समिति गठित की जाए।”
साथ ही कालाबाजारी, अवैध भंडारण तथा अन्य राज्यों में परिगमन की स्थिति में कानूनी कार्रवाई को अनिवार्य बताया गया।
उर्वरक की मांग और सत्यापन प्रक्रिया
उन्होंने सभी अधिकारियों को निर्देशित किया कि—
- यूरिया और डीएपी की जिला-वार मांग प्रतिदिन भेजी जाए
- अधिक मात्रा में उर्वरक खरीदने वाले किसानों का भौतिक सत्यापन अनिवार्य किया जाए
गुणवत्ता नियंत्रण पर जोर
गुण नियंत्रण समीक्षा के दौरान अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि—
- केवल संदिग्ध कृषि आदानों के ही नमूने लिए जाएं
- पूर्व वर्षों में अमानक पाए गए प्रकरणों में न्यायालय में वाद दायर करना सुनिश्चित किया जाए
अधिकारियों और वैज्ञानिकों ने दी उपस्थिति
बैठक में संयुक्त निदेशक कृषि, उप निदेशक उद्यान, सहायक निदेशक कृषि, उद्यान विभाग के अधिकारी, कृषि अधिकारी और कृषि अनुसंधान केंद्र के वैज्ञानिक उपस्थित रहे।