परंपरागत खेती से परेशान था किसान
झुंझुनूं, जिले के मण्डावा उपखंड के तेतरा गांव निवासी किसान हीरा सिंह की कहानी आज हजारों किसानों के लिए प्रेरणा बन गई है।
पहले वे खुले खेतों में सरसों, गेहूं और मौसमी सब्जियों की खेती करते थे, लेकिन मौसम की अनिश्चितता के कारण उन्हें बार-बार नुकसान झेलना पड़ता था।
सरकारी योजनाओं से बदली तस्वीर
आर्थिक चुनौतियों से बाहर निकलने के लिए हीरा सिंह ने कृषि एवं उद्यानिकी विभाग की आधुनिक खेती योजनाओं को अपनाया।
सरकार की ओर से उन्हें
- फार्म पॉण्ड (खेत तलाई) के लिए 1.35 लाख रुपये का अनुदान
- 4000 वर्ग मीटर पॉली हाउस के लिए 31 लाख रुपये की सब्सिडी
प्रदान की गई।
ड्रिप सिंचाई और पॉली हाउस का कमाल
पॉली हाउस तकनीक से फसलें अब कीट और रोगों से सुरक्षित हैं।
वहीं ड्रिप सिंचाई से पानी और खाद की बचत हो रही है।
इससे लागत घटी और उत्पादन लगातार बढ़ा।
10 गुना बढ़ी आय, सालभर उत्पादन
आज हीरा सिंह सालभर सब्जियों का उत्पादन कर रहे हैं और मंडियों में सीधी बिक्री से अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं।
- पारंपरिक खेती के मुकाबले 10 गुना अधिक लाभ
- वार्षिक आय करीब 10 लाख रुपये
ग्राम उत्थान शिविर में हुआ सम्मान
ग्राम उत्थान शिविर, मण्डावा में हीरा सिंह को उनके उत्कृष्ट कार्य के लिए प्रमाण-पत्र देकर सम्मानित किया गया।
इस मौके पर उन्होंने कहा:
सरकारी योजनाओं ने मेरी सोच और जिंदगी दोनों बदल दी। आज मैं दूसरों को भी आधुनिक खेती के लिए प्रेरित कर रहा हूं।
अन्य किसानों के लिए संदेश
आज हीरा सिंह झुंझुनूं जिले के किसानों को पॉली हाउस खेती, ड्रिप सिंचाई और आधुनिक तकनीक अपनाने के लिए मार्गदर्शन दे रहे हैं।
