Archive Notice: This article was originally published on 4 नवम्बर 2025.
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लेट फीस सीमा और पारदर्शिता में बढ़ोतरी हुई

बैंक अब लेट फीस चार्ज करने से पहले ग्राहकों को स्पष्ट सूचना देंगे और फीस में किसी भी तरह की बदलाव की जानकारी 1 महीने पहले देना होगा। अब लेनदेन की सुरक्षा बढ़ाने के लिए टू फैक्टर ऑथेंटिकेशन जरूरी कर दिया गया है।

रिजर्व बैंक ऑफ़ इंडिया के द्वारा यह बदलाव इसलिए किया गया है ताकि कार्ड धारकों को अनावश्यक शुल्क और दंड से बचाया जा सके। इन नियमों का लाभ उठाकर ग्राहक लेट फीस से बच सकते हैं।

क्रेडिट कार्ड धारकों के लिए जरूरी है कि वह क्रेडिट कार्ड बिलों की समीक्षा करते रहे और समय पर न्यूनतम भुगतान करें और ऑटोमेटिक पेमेंट सेटअप करें ताकि लेट फीस का कोई भी खतरा न हो। रिजर्व बैंक ऑफ़ इंडिया के इन नियमों से भारतीय कर धारकों को वृत्तीय दबाव से राहत मिलेगी।इस ग्राहकों का क्रेडिट स्कोर सुरक्षित होगा।

लेट फीस से बचने के उपाय

ग्राहकों को सुझाव दिया गया है कि वह अपने क्रेडिट कार्ड बिल नियमित से जांच और समय पर नियमित राशि का भुगतान करें। अगर हो सके तो ऑटो पेमेंट भी सेट कर ले इससे लेट फीस नहीं लगेगा और उनका क्रेडिट स्कोर अच्छा हो जाएगा। रिजर्व बैंक ऑफ़ इंडिया के द्वारा यह नियम ग्राहकों के हित में बनाया गया है।

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