चूरू, बेटियां और महिलाएं आज अलग-अलग क्षेत्रों में अपनी पहचान बना रही हैं। चूरू पुलिस में चालक कांस्टेबल बेनजीर खान की कहानी भी संघर्ष, हौसले और लगातार प्रयास की ऐसी ही कहानी है।
बेनजीर का पीहर बिसाऊ में है, जबकि उनका ससुराल निराधनूं में है। पुलिस विभाग में चालक के रूप में काम करते हुए उन्होंने न केवल अपनी पहचान बनाई, बल्कि उन महिलाओं के लिए भी उदाहरण पेश किया जो पारिवारिक और सामाजिक परिस्थितियों के बीच अपने करियर का सपना पूरा करना चाहती हैं।
2019 में पुलिस भर्ती में हुआ चयन
बेनजीर का चयन पुलिस भर्ती परीक्षा-2019 में हुआ। चालक कांस्टेबल पद के लिए उन्होंने पहली बार प्रयास किया और पहले ही प्रयास में सफलता हासिल की।
हालांकि पुलिस में जाने का उनका सफर इतना आसान नहीं था। इससे पहले उन्होंने कांस्टेबल पद के लिए तीन बार प्रयास किया था।
पहले प्रयास में वजन कम होने के कारण उनका चयन नहीं हो सका। दूसरे प्रयास में मेरिट में नंबर कम रहने से वे चयनित नहीं हुईं। इसके बाद तीसरे प्रयास में उन्होंने कांस्टेबल पद हासिल किया।
पहले से सीख लिया था वाहन चलाना
बेनजीर ने पुलिस भर्ती के दौरान ही वाहन चलाने का हुनर सीख लिया था। यही अनुभव आगे उनके लिए काफी उपयोगी साबित हुआ।
चालक कांस्टेबल पद के लिए पहली बार आवेदन करने पर ही उनका चयन हो गया और उन्होंने पुलिस वाहन की स्टेयरिंग संभालकर अपनी नई जिम्मेदारी शुरू की।
शादी के बाद भी नहीं छोड़ा लक्ष्य
बेनजीर की कहानी में एक महत्वपूर्ण पड़ाव शादी के बाद का सफर भी है। शादी के बाद भी उन्होंने अपने लक्ष्य को नहीं छोड़ा और पुलिस सेवा में आगे बढ़ती रहीं।
आज वह 112 पुलिस वाहन की चालक के रूप में अपनी जिम्मेदारी निभा रही हैं।
उनका सफर यह दिखाता है कि पारिवारिक जिम्मेदारियों के साथ भी अपने लक्ष्य के लिए लगातार प्रयास किया जा सकता है।
पिता और मां ने बढ़ाया हौसला
बेनजीर के पुलिस में जाने के फैसले में उनके माता-पिता का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा। उनके पिता इलियास अली और मां रियाज बानो ने उन्हें पुलिस सेवा में जाने के लिए प्रोत्साहित किया।
वर्ष 2019 में पिता के निधन के बाद भी बेनजीर ने अपना लक्ष्य नहीं छोड़ा और पुलिस सेवा में आगे बढ़ने का सफर जारी रखा।
महिलाओं के लिए क्या संदेश देती है बेनजीर की कहानी?
बेनजीर की उपलब्धि सिर्फ नौकरी हासिल करने तक सीमित नहीं है। उनका सफर असफलता के बाद दोबारा प्रयास करने और लक्ष्य पर टिके रहने का उदाहरण है।
कांस्टेबल भर्ती में दो बार असफल होने के बाद उन्होंने प्रयास जारी रखा। तीसरे प्रयास में सफलता हासिल की और बाद में चालक कांस्टेबल के रूप में भी चयनित हुईं।
उनकी कहानी उन महिलाओं के लिए प्रेरणा बन सकती है जो परिस्थितियों, सामाजिक धारणाओं या पारिवारिक जिम्मेदारियों के कारण अपने करियर के सपनों को पीछे छोड़ देती हैं।
मुस्लिम समाज की युवतियों के लिए भी प्रेरणा
बेनजीर मुस्लिम समाज से आने वाली उन युवतियों के लिए भी प्रेरणा का उदाहरण पेश कर रही हैं, जो पुलिस, सेना, प्रशासन, खेल, शिक्षा या अन्य क्षेत्रों में करियर बनाना चाहती हैं।
उनकी यात्रा यह संदेश देती है कि अवसर मिलने पर बेटियां हर क्षेत्र में अपनी योग्यता साबित कर सकती हैं।
बेनजीर का पुलिस की वर्दी पहनकर 112 पुलिस वाहन की चालक के रूप में जिम्मेदारी निभाना बदलते सामाजिक परिवेश की तस्वीर भी सामने रखता है।






