चूरू जिले की दुधवाखारा थाना पुलिस ने साइबर अपराध के खिलाफ बड़ी सफलता हासिल करते हुए USDT (क्रिप्टोकरेंसी) को भारतीय मुद्रा में बदलने वाले एक हाई-टेक साइबर सिंडिकेट का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने एक टेक्निकल एक्सपर्ट सहित चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिन्होंने महज एक महीने में करीब 2.29 करोड़ रुपये के संदिग्ध डिजिटल ट्रांजैक्शन किए।
पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) और आईटी एक्ट की संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
साइबर सेल के इनपुट से खुला राज
पूरे मामले का खुलासा चूरू साइबर सेल द्वारा मिले म्यूल अकाउंट्स और संदिग्ध बैंक ट्रांजैक्शन से जुड़े तकनीकी इनपुट के आधार पर हुआ। दुधवाखारा थाना पुलिस की साइबर डेस्क ने डिजिटल लेनदेन, आईपी एड्रेस और बैंक खातों का गहन विश्लेषण कर गैंग तक पहुंच बनाई।
ऐसे चलता था करोड़ों का खेल
जांच में सामने आया कि आरोपी Binance और TronLink जैसे अंतरराष्ट्रीय क्रिप्टो प्लेटफॉर्म तथा Telegram के जरिए नेटवर्क संचालित कर रहे थे।
गिरफ्तार टेक्निकल एक्सपर्ट दीपांशु को प्रतिदिन बड़ी मात्रा में USDT प्राप्त होती थी। इसके बाद वह टेलीग्राम के माध्यम से डीलरों को ऊंचे दाम पर क्रिप्टो ट्रांसफर करता था।
भारतीय रुपये प्राप्त करने के लिए आरोपी भवानी सिंह, संजय सिंह और मनीष मेघवाल कथित तौर पर बैंक खाते (म्यूल अकाउंट्स) उपलब्ध करवाते थे। रकम खातों में आने के बाद एटीएम और चेक के जरिए नकदी निकालकर सिंडिकेट तक पहुंचाई जाती थी।
पश्चिम बंगाल भागे, लौटते ही दबोचे गए
पुलिस के अनुसार, करोड़ों रुपये के संदिग्ध लेनदेन के बाद आरोपी अपना नेटवर्क बढ़ाने और पुलिस से बचने के लिए पश्चिम बंगाल चले गए थे। हालांकि, वापस चूरू लौटते ही पुलिस ने घेराबंदी कर चारों को गिरफ्तार कर लिया।
कांस्टेबल प्रदीप कुमार की रही अहम भूमिका
इस पूरे ऑपरेशन में साइबर डेस्क के कांस्टेबल प्रदीप कुमार की डिजिटल ट्रैकिंग और तकनीकी जांच महत्वपूर्ण रही। पुलिस अब गिरफ्तार आरोपियों से ठगी की रकम, नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और पूरे रैकेट के बारे में पूछताछ कर रही है।






