चूरू। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कोर्ट ने घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत दायर एक महिला की याचिका खारिज करते हुए उसके खिलाफ न्यायालय में गलत साक्ष्य पेश करने के संबंध में विधिक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
अदालत ने मामले में पेश किए गए साक्ष्यों और दस्तावेजों के आधार पर माना कि याचिकाकर्ता ने महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाया और शपथ-पत्र में गलत बयान दिए।
दहेज और मारपीट के लगाए थे आरोप
महिला ने न्यायालय में प्रार्थना पत्र दायर कर अपने पति और ससुराल पक्ष पर दहेज में बाइक, प्लॉट और नकदी की मांग करने के आरोप लगाए थे।
याचिका में मारपीट कर घर से निकालने का भी आरोप लगाया गया था। महिला ने अदालत से भरण-पोषण और हर्जाने की मांग भी की थी।
सुनवाई के दौरान सामने आए अलग तथ्य
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष पेश किए गए साक्ष्यों और दस्तावेजों को लेकर अलग स्थिति सामने आई। उपलब्ध विवरण के अनुसार अदालत ने माना कि महिला के साथ बताई गई तरह की प्रताड़ना के तथ्य साबित नहीं हुए और वह अपनी इच्छा से ससुराल छोड़कर अलग रह रही थी।
मामले के रिकॉर्ड में महिला से जुड़े पूर्व के कुछ मुकदमों और हाई कोर्ट में दायर एक अन्य याचिका का भी उल्लेख सामने आया। अदालत के अनुसार इन तथ्यों को घरेलू हिंसा की याचिका में नहीं बताया गया था।
महत्वपूर्ण तथ्य छिपाने पर कोर्ट ने दिए कार्रवाई के निर्देश
अदालत ने मामले में तथ्यों को छिपाने और शपथ-पत्र में गलत जानकारी देने को गंभीरता से लिया। इसके बाद घरेलू हिंसा संबंधी याचिका खारिज कर दी गई।
साथ ही महिला के खिलाफ न्यायालय में कथित तौर पर झूठे साक्ष्य प्रस्तुत करने के संबंध में अलग से कानूनी कार्रवाई शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं।
पति और ससुराल पक्ष की ओर से पैरवी
मामले में पति और ससुराल पक्ष की ओर से एडवोकेट मनोज गहलोत ने पैरवी की।






