चूरू में महिला पुलिस की पहल से दो साल बाद फिर बसा परिवार
चूरू। जिला पुलिस के ‘पारिवारिक बैठक अभियान’ के तहत एक परिवार को फिर से जोड़ने की पहल रंग लाई है। महिला थाना पुलिस, सखी वन स्टॉप सेंटर और महिला परामर्श केंद्र के संयुक्त प्रयासों से करीब दो साल से अलग रह रहे दंपती के बीच सुलह कराई गई।
देपालसर रोड स्थित झुग्गी निवासी अजीत और सुलोचना का करीब चार साल पहले विवाह हुआ था। दोनों का तीन वर्ष का एक बेटा भी है।
मकान और नौकरी को लेकर बढ़ा था विवाद
जानकारी के अनुसार, पक्के मकान के निर्माण और पत्नी की नौकरी को लेकर पति-पत्नी के बीच मतभेद हो गए थे। विवाद बढ़ने के बाद अजीत काम के सिलसिले में असम चला गया, जबकि सुलोचना अपने मायके हनुमानगढ़ में रहने लगी।
इस तरह दोनों करीब दो साल तक अलग-अलग रहे और उनका पारिवारिक जीवन प्रभावित रहा।
महिला थाना पुलिस ने शुरू की काउंसलिंग
मामला सामने आने के बाद महिला थानाधिकारी कुसुमलता ने परिवार को फिर से जोड़ने के लिए पहल की। महिला परामर्श केंद्र और सखी सेंटर के सहयोग से दोनों पक्षों को पारिवारिक बैठक और काउंसलिंग के लिए बुलाया गया।
करीब एक महीने तक कई दौर की काउंसलिंग चली। इस दौरान पति-पत्नी के बीच बातचीत कर उनके मतभेदों और गिले-शिकवों को दूर करने का प्रयास किया गया।
आपसी सहमति से फिर साथ रहने का फैसला
काउंसलिंग के दौरान दोनों पक्षों ने एक-दूसरे की बात सुनी और पुराने मतभेदों को दूर करने पर सहमति बनी। इसके बाद दंपती ने आपसी सहमति से दोबारा साथ रहने का निर्णय लिया।
पुलिस और सखी सेंटर की टीम की मौजूदगी में महीनों से बंद पड़ी झुग्गी का ताला खुलवाया गया। इसके बाद दंपती को खुशी-खुशी उनके घर के लिए विदा किया गया।
मासूम बेटे को मिला माता-पिता का साथ
इस पारिवारिक सुलह का सबसे बड़ा असर उनके तीन साल के मासूम बेटे पर पड़ा है। लंबे समय से माता-पिता से अलग रह रहे बच्चे को अब दोनों का साथ मिल सकेगा।
महिला पुलिस और सहयोगी संस्थाओं की इस पहल से परिवार में फिर से खुशियां लौट आईं। पारिवारिक विवादों को संवाद और काउंसलिंग के माध्यम से सुलझाने की यह पहल अन्य परिवारों के लिए भी सकारात्मक उदाहरण बनकर सामने आई है।






