चूरू। देपालसर स्थित तारागढ़ी सिद्धपीठ गणेश मंदिर में गणेश चतुर्थी महोत्सव इस बार भी भव्य रूप से मनाया जाएगा। सोमवार 14 सितंबर को अलसुबह प्रथम पूज्य भगवान श्रीगणेश को 1151 किलो के विशाल केसरिया लड्डू का भोग अर्पित किया जाएगा।
भोग के बाद दिनभर श्रद्धालुओं में प्रसाद का वितरण किया जाएगा। गणेश सेवा समिति की बैठक में सर्वसम्मति से इस महाभोग का निर्णय लिया गया था।
दो दिन की मेहनत से तैयार हुआ 1151 किलो का महालड्डू
गणेश सेवा समिति के अध्यक्ष बहादुर सिंह फगेड़िया के अनुसार महालड्डू को हलवाई राकेश शर्मा और उनकी टीम ने दो दिन की कड़ी मेहनत से तैयार किया है। इसकी तैयारी 12 सितंबर से शुरू की गई थी।
गणेश चतुर्थी पर महालड्डू का भोग तारागढ़ी सिद्धपीठ की प्रमुख धार्मिक परंपराओं में शामिल है।
100 किलो से शुरू हुई थी महालड्डू की परंपरा
मंदिर में महालड्डू के भोग की परंपरा वर्ष 2001 में 100 किलो के लड्डू से शुरू हुई थी। इसके बाद समय के साथ लड्डू का वजन बढ़ता गया।
परंपरा के तहत 151 किलो, 251 किलो, 311 किलो, 551 किलो, 651 किलो और 901 किलो के लड्डू भगवान गणेश को अर्पित किए गए।
वर्ष 2012 से 2022 तक लगातार 1001 किलो का महालड्डू भोग में अर्पित किया जाता रहा। वहीं वर्ष 2023 से 1151 किलो के महालड्डू की परंपरा लगातार जारी है।
25 वर्षों से सामाजिक सरोकारों में सक्रिय समिति
गणेश सेवा समिति के सचिव विजय पूनिया ने बताया कि समिति केवल धार्मिक आयोजनों तक सीमित नहीं है, बल्कि पिछले 25 वर्षों से सामाजिक सरोकारों में भी सक्रिय भूमिका निभा रही है।
समिति की ओर से मंदिर में महाप्रसाद वितरण के अलावा जरूरतमंद छात्र-छात्राओं की शिक्षा में सहायता और रक्तदान शिविरों सहित विभिन्न जनहितैषी गतिविधियां नियमित रूप से आयोजित की जाती हैं।
गणेश चतुर्थी पर होने वाले महालड्डू भोग और प्रसाद वितरण को लेकर मंदिर परिसर में तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। पर्व के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है।






