चूरू। जिले में महिला उद्यमिता और डिजिटल रोजगार को बढ़ावा देने की दिशा में नई पहल की गई है। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जिला उत्थान योजना के तहत ग्रामीण विकास विभाग ने 3 करोड़ 50 लाख रुपये की लागत से सेंटर फॉर एंटरप्रेन्योरशिप एंड कैपेसिटी बिल्डिंग एवं रूरल वूमेन बीपीओ सेंटर के लिए स्वीकृति जारी की है।
इस पहल का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं को कौशल प्रशिक्षण, उद्यमिता और डिजिटल क्षेत्र में स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना है।
स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को मिलेगा प्रशिक्षण
एसीईओ भागचंद खारिया ने बताया कि केंद्र के माध्यम से स्वयं सहायता समूहों और राजीविका से जुड़ी महिलाओं की क्षमता बढ़ाने के लिए विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
महिलाओं को कौशल प्रशिक्षण के साथ मेंटरशिप भी दी जाएगी, ताकि वे प्रशिक्षण के बाद अपने नए उद्यम शुरू कर सकें और उन्हें बेहतर तरीके से संचालित कर सकें।
स्थानीय उत्पादों की ब्रांडिंग और मार्केटिंग में मदद
केंद्र के माध्यम से महिलाओं को स्थानीय उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने में भी सहायता मिलेगी। इसके तहत उत्पादों की ब्रांडिंग, पैकेजिंग और मार्केटिंग से संबंधित प्रशिक्षण एवं सहयोग उपलब्ध कराया जाएगा।
इससे स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं द्वारा तैयार किए जा रहे स्थानीय उत्पादों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने में मदद मिलने की उम्मीद है।
ग्रामीण महिलाओं को मिलेगा डिजिटल रोजगार
रूरल वूमेन बीपीओ सेंटर राज्य सरकार के बजट 2026-27 की महत्वाकांक्षी योजनाओं में शामिल है। इसके तहत ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं को डिजिटल और आईटी क्षेत्र में स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है।
महिलाओं को बीपीओ और डेटा एंट्री जैसे कार्यों से जोड़कर रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की योजना है।
शहरों की ओर पलायन रोकने का लक्ष्य
योजना के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को उनके क्षेत्र के आसपास ही रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा। इसका एक उद्देश्य रोजगार के लिए महिलाओं के शहरों की ओर होने वाले पलायन को कम करना भी है।
सरकार की इस पहल से ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने और उनकी रोजगार क्षमता बढ़ाने पर जोर रहेगा।






