राजलदेसर, । नगर पालिका चुनाव के नतीजों ने एक बार फिर राजलदेसर की राजनीति में त्रिशंकु स्थिति पैदा कर दी है। 35 वार्डों वाली नगरपालिका में मतदाताओं ने किसी भी प्रमुख दल को स्पष्ट बहुमत नहीं दिया है।
चुनाव परिणाम में भाजपा और कांग्रेस दोनों को 14-14 सीटें मिली हैं। वहीं 5 निर्दलीय और RLP के 2 पार्षद चुनाव जीतकर आए हैं।
35 सदस्यीय बोर्ड में बहुमत के लिए 18 पार्षदों का समर्थन जरूरी है। ऐसे में भाजपा और कांग्रेस दोनों ही बहुमत के आंकड़े से 4 सीट दूर हैं।
7 पार्षदों के हाथ में बोर्ड की चाबी
अब राजलदेसर नगरपालिका में बोर्ड किसका बनेगा, इसका फैसला 5 निर्दलीय और 2 RLP पार्षदों के रुख से तय होने की संभावना है।
इन सात पार्षदों का समर्थन जिस खेमे को मिलता है, वह बहुमत के आंकड़े तक पहुंच सकता है। यही वजह है कि चुनाव परिणाम के बाद सियासी जोड़-तोड़ और संपर्क की राजनीति तेज होने की चर्चा है।
2021 का चुनावी गणित भी था ऐसा ही
राजलदेसर में इस बार का चुनावी गणित वर्ष 2021 के नतीजों की याद दिला रहा है। उस चुनाव में भी भाजपा और कांग्रेस को 14-14 सीटें मिली थीं, जबकि निर्दलीयों ने 7 सीटों पर जीत दर्ज की थी।
इस बार निर्दलीयों की संख्या घटकर 5 हुई है, जबकि RLP ने 2 सीटों पर जीत दर्ज कर बोर्ड के गणित को और दिलचस्प बना दिया है।
दो-दो वोट से हुई कांटे की जीत
चुनाव में कई वार्डों में मुकाबला बेहद करीबी रहा। वार्ड 6 से भाजपा की अनुसुइया मारू, वार्ड 8 से निर्दलीय शारदा देवी मारू और वार्ड 34 से कांग्रेस के विनोद कुमार ने महज 2-2 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की।
वहीं वार्ड 18 से कांग्रेस के जाकिर हुसैन ने 226 वोटों के अंतर से जीत हासिल की, जो दिए गए परिणामों में सबसे बड़े जीत अंतर के रूप में सामने आया।
अध्यक्ष पद को लेकर बढ़ी सियासी हलचल
परिणाम आने के बाद दोनों प्रमुख दलों के खेमों में बाड़ाबंदी और राजनीतिक जोड़-तोड़ की चर्चाएं तेज हो गई हैं। भाजपा और कांग्रेस के सामने अपने-अपने पक्ष में बहुमत जुटाने की चुनौती है।
अब सभी की नजरें 5 निर्दलीय और 2 RLP पार्षदों पर टिकी हैं। इन पार्षदों का रुख तय करेगा कि राजलदेसर नगरपालिका के अध्यक्ष पद की सत्ता किस खेमे के हाथ में जाती है।






