पिछले पालिका मंडल में भाजपा और कांग्रेस से एक-एक राजपूत पार्षद जीते थे, इस बार दोनों दलों ने नहीं बनाया उम्मीदवार।
रतनगढ़। निकाय चुनाव के लिए भाजपा और कांग्रेस की ओर से टिकट वितरण के बाद शहर में चुनावी समीकरण को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। इस बार राजपूत समाज के किसी भी उम्मीदवार को भाजपा या कांग्रेस ने अपना अधिकृत प्रत्याशी नहीं बनाया है।
यह स्थिति इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि पिछले पालिका मंडल में राजपूत समाज से जुड़े दो पार्षद चुनाव जीतकर पालिका पहुंचे थे। इनमें एक पार्षद भाजपा और दूसरा कांग्रेस के टिकट पर निर्वाचित हुआ था।
पिछले बोर्ड में भाजपा-कांग्रेस से थे दो पार्षद
गत पालिका मंडल के चुनाव में वार्ड संख्या 2 से कांग्रेस के अजीत सिंह बीका और वार्ड संख्या 17 से भाजपा की किरण कंवर चुनाव जीतकर पार्षद बनी थीं।
इस बार दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों की ओर से राजपूत समाज के किसी भी व्यक्ति को टिकट नहीं मिलने से राजनीतिक हलकों में इसे लेकर चर्चा शुरू हो गई है।
वार्ड 2, 5 और 14 के समीकरण पर नजर
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि रतनगढ़ शहर के कुछ वार्डों में राजपूत समाज के मतदाता चुनावी समीकरण को प्रभावित करने की स्थिति में हैं।
विशेष रूप से वार्ड संख्या 2, 5 और 14 में राजपूत समाज के मतदाताओं की भूमिका को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ऐसे में भाजपा और कांग्रेस के टिकट वितरण के बाद अब इन वार्डों में समाज के मतदाता किस प्रत्याशी के पक्ष में जाते हैं, इस पर राजनीतिक दलों और प्रत्याशियों की नजर रहेगी।
निर्दलीय प्रत्याशियों की भूमिका भी अहम
भाजपा और कांग्रेस से टिकट नहीं मिलने के बाद राजपूत समाज से जुड़े संभावित दावेदारों की निर्दलीय भूमिका भी चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकती है। हालांकि अंतिम तस्वीर नाम वापसी और चुनाव मैदान में बचे प्रत्याशियों के बाद ही स्पष्ट होगी।
रतनगढ़ निकाय चुनाव में अब प्रत्याशियों के प्रचार के साथ-साथ वार्डवार सामाजिक और राजनीतिक समीकरण भी चर्चा का प्रमुख विषय बन गए हैं।






