रतनगढ़। राज्य सरकार द्वारा ग्रीष्मकालीन अवकाश में कटौती के निर्णय के विरोध में राजस्थान शिक्षक संघ के आह्वान पर रविवार को रतनगढ़ क्षेत्र के शिक्षकों ने दो दिवसीय कार्य बहिष्कार शुरू किया। शिक्षकों ने सरकार के फैसले को कर्मचारी विरोधी बताते हुए इसे शिक्षकों के अधिकारों पर कुठाराघात करार दिया।
तहसील अध्यक्ष भोजराज शर्मा, तहसील मंत्री मुरलीधर अजमेरिया, कार्यकारी अध्यक्ष बाबूलाल मुंदलिया, सभाध्यक्ष रामचंद्र ऐचरा और उपसभाध्यक्ष महेंद्र सिंह शेखावत के नेतृत्व में आयोजित विरोध प्रदर्शन में बड़ी संख्या में शिक्षक एवं शिक्षिकाएं शामिल हुए।
सरकार के फैसले पर जताई नाराजगी
शिक्षक संगठन के पदाधिकारियों ने कहा कि सरकार शिक्षकों की भावनाओं और सुझावों की अनदेखी करते हुए एकतरफा निर्णय ले रही है। उनका आरोप है कि ग्रीष्मकालीन अवकाश में कटौती का आदेश भी इसी प्रकार का निर्णय है, जिसे शिक्षक समाज स्वीकार नहीं करेगा।
प्रांतीय संयुक्त मंत्री शुभकरण नैण, प्रांतीय कार्यकारिणी सदस्य चौथमल चीनिया, जिला कार्यकारी अध्यक्ष सुरेंद्र सीगड़, जिला उपाध्यक्ष भंवरलाल पूनिया, जिला संयुक्त मंत्री मोहम्मद शकील, जिला उपसभाध्यक्ष महेंद्र हुड्डा, संगठन मंत्री रामकृष्ण ज्याणी, संघर्ष समिति सह-संयोजक अमरदीप और प्रकाश चौधरी ने कहा कि आंदोलन को आगे भी जारी रखा जाएगा।
30 जून को आदेशों की प्रतियां जलाकर होगा विरोध
संघर्ष समिति संयोजक बजरंग लाल बिस्सू, वरिष्ठ उपाध्यक्ष शंकरलाल मीणा, सरस्वती मारू और कोषाध्यक्ष पन्नालाल जांघू ने बताया कि आंदोलन के अगले चरण में 30 जून 2026 को ब्लॉक मुख्यालय पर सरकार के अवकाश कटौती संबंधी आदेशों की प्रतियां जलाकर विरोध प्रदर्शन किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि राज्यभर के शिक्षक लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांगों को सरकार के सामने रखेंगे और आंदोलन को व्यापक स्वरूप दिया जाएगा।
शिक्षकों ने रखीं ये प्रमुख मांगें
विरोध प्रदर्शन के दौरान शिक्षकों ने सरकार से ग्रीष्मकालीन अवकाश में कटौती का आदेश तत्काल वापस लेने, शिक्षकों के अधिकारों की रक्षा करने तथा शिक्षा व्यवस्था से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णय शिक्षक संगठनों से संवाद के बाद ही लेने की मांग की।
कार्य बहिष्कार में मनोज सारस्वत, राजकुमार लुहार, मदनलाल प्रजापत, कंचन भार्गव, सुमन कंवर, गरिमा परिहार, सुमन पांडे, पूनी मेघवाल, विजयपाल, नानूराम सोहु, धर्मपाल बुगालिया, शीशपाल, विनोद सैनी, सरोज, कमला, कपिल मीणा, मनोज डूडी, सुभाष नैण, रामचंद्र खीचड़, राकेश खीचड़, सांवरमल बरोड़, धर्मपाल ढेवा, सोमदत्त शर्मा, उम्मेद कुम्हार, महिपाल चौधरी और रणजीत नायक सहित बड़ी संख्या में शिक्षक एवं शिक्षिकाएं मौजूद रहे।






