सरदारशहर/रतनगढ़। अब सरदारशहर के 40 सरकारी स्कूलों में 43 इंटरैक्टिव बोर्ड से पढ़ाई होगी। रतनगढ़ के प्रवासी भामाशाहों के सहयोग से चूरू जिले की सरकारी शिक्षण संस्थाओं में आधुनिक तकनीक से शिक्षण उपलब्ध करवाने के लिए चल रही इंटरैक्टिव बोर्ड परियोजना के तहत यह पहल की जा रही है।
यह परियोजना श्री गांधी बाल निकेतन रतनगढ़ के संस्थापक सचिव स्वर्गीय चम्पालाल उपाध्याय की शैक्षणिक विकास की सोच को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से संचालित की जा रही है।
चयनित स्कूलों के संस्था प्रधानों की बैठक
इंटरैक्टिव बोर्ड परियोजना के तहत चयनित स्कूलों के संस्था प्रधानों और शिक्षा अधिकारियों की बैठक सोमवार दोपहर श्री गांधी बाल निकेतन, रतनगढ़ में आयोजित हुई।
बैठक में संबंधित स्कूलों के संस्था प्रधानों ने अपने अनुरोध पत्र प्रोजेक्ट फाउंडर राजीव उपाध्याय को सौंपे।
कार्यक्रम में शिक्षा विभाग के उपनिदेशक अशोक कुमार पारीक, एडीपीसी समसा सरिता आत्रेय, रतनगढ़ सीबीईओ संदीप कुमार व्यास, सरदारशहर सीबीईओ सुभाष सोनगरा, पूर्व सीबीईओ कुलदीप कुमार व्यास, समाजसेवी रामनारायण व्यास तथा प्रोजेक्ट फाउंडर एवं निकेतन सचिव राजीव उपाध्याय मंचस्थ रहे।
सरकारी स्कूलों में तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा
शिक्षा विभाग के उपनिदेशक अशोक कुमार पारीक ने कहा कि राजीव उपाध्याय के प्रयासों से चूरू जिला शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा कि चूरू देश का पहला ऐसा जिला है, जहां सभी सरकारी कॉलेजों में इंटरैक्टिव बोर्ड से पढ़ाई हो रही है। उन्होंने उम्मीद जताई कि जल्द ही चूरू ऐसा पहला जिला बनेगा, जिसके सभी सरकारी स्कूलों में भी इंटरैक्टिव बोर्ड से पढ़ाई होगी।
पारीक के अनुसार, इन बोर्ड की स्थापना के बाद सरकारी स्कूलों में नामांकन और पढ़ाई की गुणवत्ता में बढ़ोतरी हुई है।
शिक्षकों की कमी के बीच तकनीक बनेगी मददगार
एडीपीसी सरिता आत्रेय ने कहा कि जिले के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी एक बड़ी चुनौती है। ऐसे में भामाशाहों के सहयोग से लगाए जा रहे इंटरैक्टिव बोर्ड विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीक आधारित गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने में मदद करेंगे।
उन्होंने कहा कि जिले के अन्य ब्लॉकों की तुलना में सरदारशहर में शिक्षकों के अधिक पद रिक्त हैं। ऐसे में इंटरैक्टिव बोर्ड यहां के विद्यार्थियों के लिए उपयोगी साबित होंगे।
भामाशाहों और परियोजना टीम का जताया आभार
सरदारशहर सीबीईओ सुभाष सोनगरा ने ब्लॉक का चयन करने के लिए भामाशाह प्रदीप सराफ और प्रेरक राजीव उपाध्याय का आभार जताया।
उन्होंने कहा कि सभी मिलकर इंटरैक्टिव बोर्ड का अधिकतम उपयोग करेंगे, ताकि विद्यार्थियों को अत्याधुनिक तकनीक से पढ़ाई का लाभ मिल सके।
पूर्व सीबीईओ एवं परियोजना समन्वयक कुलदीप व्यास ने कहा कि रतनगढ़ के भामाशाहों के सहयोग से पूरे चूरू जिले में इंटरैक्टिव बोर्ड लगवाने का कार्य किया जा रहा है। उन्होंने इसे सरकारी स्कूलों के सुदृढ़ीकरण की दिशा में सराहनीय पहल बताया।
कक्षा में नियमित उपयोग पर जोर
प्रोजेक्ट फाउंडर राजीव उपाध्याय ने इंटरैक्टिव बोर्ड की स्थापना के बाद उसके अधिकाधिक उपयोग का आह्वान किया।
उन्होंने बताया कि इंटरैक्टिव बोर्ड 5 साल की ऑनसाइट वारंटी के साथ आता है। उन्होंने कहा कि बोर्ड लगाने के बाद कक्षा-कक्ष में ताला नहीं लगना चाहिए, बल्कि ऐसे कक्ष में बोर्ड लगाया जाए जहां विद्यालय की सभी कक्षाएं कम से कम एक-एक पीरियड इस बोर्ड से पढ़ें और नई तकनीक का अधिकतम लाभ उठा सकें।
