झुंझुनूं, जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, झुंझुनूं ने बीमा कंपनियों की मनमानी पर सख्त रुख अपनाते हुए रिलायंस जनरल इंश्योरेंस कंपनी को उपभोक्ता का हैल्थ इंश्योरेंस क्लेम चुकाने के आदेश दिए हैं। आयोग ने इसे सेवा में गंभीर कमी करार दिया है।
सुप्रीम कोर्ट की नजीर के साथ सख्त टिप्पणी
आयोग अध्यक्ष मनोज कुमार मील ने सुप्रीम कोर्ट की नजीर का हवाला देते हुए कहा
बीमा कंपनी से यह अपेक्षा नहीं की जाती कि वह केवल अपने मुनाफे की परवाह करे, बल्कि बीमा धारक के साथ निष्पक्ष व्यवहार करे।
यह टिप्पणी बीमा कंपनियों के लिए एक स्पष्ट संदेश मानी जा रही है।
क्या है पूरा मामला?
बड़ौदी की ढाणी, खेतड़ी निवासी शिशराम सैनी ने वर्ष 2013 में रिलायंस जनरल इंश्योरेंस से स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी ली थी।
पॉलिसी अवधि के दौरान अक्टूबर 2014 में अचानक तबीयत बिगड़ने पर उन्हें जयपुर के निजी अस्पताल में हार्ट सर्जरी करानी पड़ी।
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इलाज पर करीब 2 लाख रुपये खर्च हुए
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सभी मेडिकल बिल व दस्तावेज कंपनी को दिए गए
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इसके बावजूद बीमा क्लेम निरस्त कर दिया गया
11 वर्षों तक लटकाया गया मामला
आयोग की सुनवाई में सामने आया कि बीमा कंपनी ने
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बार-बार अनावश्यक आपत्तियां लगाईं
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एक जैसे प्रार्थना पत्र देकर मामला लंबित रखा
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राष्ट्रीय लोक अदालत के कई अवसरों पर भी निस्तारण में रुचि नहीं दिखाई
आयोग ने इसे उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम की भावना के विरुद्ध बताया।
आयोग का अंतिम आदेश
आयोग अध्यक्ष मनोज कुमार मील एवं सदस्य प्रमेन्द्र कुमार सैनी की पीठ ने आदेश दिया कि—
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₹1,81,529 की क्लेम राशि
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वाद दायर करने की तिथि से 9% वार्षिक ब्याज
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मानसिक, शारीरिक व आर्थिक क्षतिपूर्ति के ₹15,500
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वाद व्यय के ₹10,500
बीमा कंपनी को उपभोक्ता को अदा करने होंगे।
आदेश की अवहेलना पर और सख्ती
आयोग ने स्पष्ट किया कि यदि तय समय में भुगतान नहीं किया गया, तो देय राशि पर 12.5% वार्षिक ब्याज लागू होगा।
