नेपाल में चीन के तिब्बत क्षेत्र से लगी सीमा के पास बुधवार को आई अचानक और विनाशकारी बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचा दी है। सबसे ज्यादा असर रसुवा जिले में देखने को मिला है, जहां भोटे कोशी नदी में अचानक आई बाढ़ ने बस्तियों, सड़कों, पुलों और जलविद्युत परियोजनाओं को भारी नुकसान पहुंचाया।
नेपाल सरकार के और मीडिया रिपोर्ट्स के ताजा आंकड़ों के मुताबिक कम से कम 95 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 403 लोग अभी लापता हैं। राहत और बचाव अभियान जारी है और अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि मृतकों का आंकड़ा और बढ़ सकता है।
105 भारतीय नागरिक भी लापता
बाढ़ के बाद बड़ी संख्या में पर्यटकों और यात्रियों के लापता होने की सूचना है। नेपाल पर्यटन बोर्ड के अनुसार प्रभावित क्षेत्र से 384 यात्रियों के लापता होने की रिपोर्ट है, जिनमें 291 विदेशी नागरिक और 93 नेपाली नागरिक शामिल हैं।
लापता विदेशी नागरिकों में करीब 105 भारतीय बताए जा रहे हैं। इसके अलावा 37 एनआरआई के भी लापता होने की जानकारी सामने आई है।
तिब्बत की ओर से अचानक बढ़ा पानी
बाढ़ का पानी स्थानीय समयानुसार सुबह करीब 9 बजे भोटे कोशी नदी में अचानक बढ़ा। रसुवा के तिमुरे, रसुवागढ़ी और स्याफ्रुबेसी इलाके सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं।
स्थानीय अधिकारियों के मुताबिक जिस समय बाढ़ आई, उस समय रसुवा में ऐसी बारिश नहीं हो रही थी जिससे इतनी बड़ी बाढ़ आ सके। इसलिए तिब्बत की ओर हिमस्खलन, ग्लेशियर से जुड़ी घटना या नदी के ऊपरी हिस्से में अचानक पानी छोड़े जाने जैसी संभावनाओं की जांच की जा रही है।
ताजा रिपोर्टों में यह भी सामने आया है कि बर्फ और चट्टानों के बड़े भूस्खलन ने ल्हेंडे नदी के प्रवाह को प्रभावित किया हो सकता है। एक संभावित कारण के तौर पर 4.4 तीव्रता के भूकंप के बाद हुए हिमस्खलन की भी जांच की जा रही है।
रसुवा में सड़क, पुल और बाजार तबाह
बाढ़ की तेज धारा ने घर, सड़कें, पुल, वाहन और बाजार क्षेत्र तक बहा दिए। तिमुरे और स्याफ्रुबेसी में भारी नुकसान हुआ है।
तिब्बत के साथ नेपाल के महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्ग पर स्थित रसुवागढ़ी सीमा क्षेत्र भी बुरी तरह प्रभावित हुआ है। सीमा शुल्क परिसर में खड़े वाहन और सामान बहने की जानकारी सामने आई है।
13 जलविद्युत परियोजनाएं प्रभावित
बाढ़ से नेपाल की बिजली परियोजनाओं को भी बड़ा झटका लगा है। रिपोर्टों के अनुसार आठ चालू और पांच निर्माणाधीन यानी कुल 13 जलविद्युत परियोजनाएं प्रभावित हुई हैं।
इन परियोजनाओं में 111 मेगावाट की रसुवागढ़ी, 78 मेगावाट की संजेन खोला और 60 मेगावाट की अपर त्रिशूली-3ए जैसी परियोजनाएं शामिल हैं।
सेना और सुरक्षा बलों ने संभाला मोर्चा
नेपाल सरकार ने राहत एवं बचाव अभियान के लिए नेपाल सेना, सशस्त्र पुलिस बल और नेपाल पुलिस को प्रभावित इलाकों में तैनात किया है।
सेना ने हेलीकॉप्टरों की मदद से प्रभावित इलाकों से लोगों को निकालना शुरू किया है। हालांकि कई स्थानों पर पानी का तेज बहाव और क्षतिग्रस्त सड़कें बचाव अभियान में चुनौती बनी हुई हैं।
400 से ज्यादा लोगों के लापता होने से चिंता बढ़ी
सबसे बड़ी चिंता 403 लोगों के लापता होने को लेकर है। इनमें बड़ी संख्या में विदेशी पर्यटक और यात्री शामिल हैं।
कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए भारतीय यात्रियों के भी प्रभावित क्षेत्र में होने की जानकारी सामने आई है। राहत दल लगातार संपर्क से बाहर लोगों की तलाश में जुटे हैं।
नेपाल में हाई अलर्ट, दोबारा बाढ़ का खतरा
अधिकारियों ने नदी किनारे रहने वाले लोगों को सतर्क रहने को कहा है। लगातार बदलती परिस्थितियों और ऊपरी इलाकों में संभावित पानी बढ़ने के कारण एक और बाढ़ की आशंका भी जताई जा रही है।
बचाव दल प्रभावित क्षेत्रों में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने और लापता लोगों की तलाश में जुटे हैं।
पीएम मोदी ने बालेन्द्र शाह से की बात, मदद का भरोसा
नेपाल में आई इस भीषण प्राकृतिक आपदा के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह से फोन पर बातचीत की।
प्रधानमंत्री मोदी ने बाढ़ में हुई जनहानि पर गहरी संवेदना व्यक्त की और कहा कि मुश्किल की इस घड़ी में भारत के लोग नेपाल के अपने भाई-बहनों के साथ मजबूती से खड़े हैं।
पीएम मोदी ने यह भी भरोसा दिलाया कि भारत नेपाल को हरसंभव मानवीय सहायता देने के लिए तैयार है। उन्होंने बताया कि भारतीय दल नेपाल के अधिकारियों के साथ राहत और बचाव कार्यों में समन्वय कर रहे हैं।
प्रधानमंत्री ने इस संबंध में सोशल मीडिया पर भी जानकारी साझा की। भारत सरकार के अनुसार दोनों देशों की टीमें रेस्क्यू और राहत प्रयासों में करीबी समन्वय कर रही हैं।
भारत की टीमों पर भी नजर
बाढ़ में भारतीय नागरिकों के लापता होने की खबरों के बीच नेपाल में भारतीय मिशन की ओर से प्रभावित भारतीय नागरिकों की सहायता के लिए संपर्क व्यवस्था सक्रिय की गई है। राहत एजेंसियां और स्थानीय प्रशासन लापता लोगों की जानकारी जुटाने में लगे हैं।
भोटे कोशी में पिछले साल भी आई थी बाढ़
भोटे कोशी और आसपास के हिमालयी इलाकों में पहले भी अचानक बाढ़ और ग्लेशियर से जुड़ी घटनाएं सामने आती रही हैं।
पिछले साल भी इस क्षेत्र में आई बाढ़ से भारी नुकसान हुआ था। इस बार की घटना ने एक बार फिर हिमालयी क्षेत्रों में अचानक आने वाली बाढ़ और ग्लेशियर से जुड़ी आपदाओं के खतरे को सामने ला दिया है।






