झुंझुनूं। राजस्थान हाईकोर्ट ने जिले में लक्ष्मी स्वयं सहायता संस्था की ओर से संचालित तीन अन्नपूर्णा रसोईयों को बंद करने के आदेश के क्रियान्वयन पर रोक लगा दी है। हाईकोर्ट ने मामले में स्थानीय निकाय विभाग (DLB), जिला कलेक्टर और नगर परिषद आयुक्त को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब मांगा है।
मामला संस्था की ओर से संचालित चिड़ावा की दो और सुल्ताना की एक अन्नपूर्णा रसोई से जुड़ा है।
15 जून के आदेश को हाईकोर्ट में दी चुनौती
मामले के अनुसार लक्ष्मी स्वयं सहायता संस्था की अध्यक्ष निशा शर्मा ने DLB निदेशक के 15 जून 2026 के आदेश को राजस्थान हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
संस्था की ओर से अधिवक्ता संजय महला और सुनीता महला ने याचिकाएं दायर करते हुए आरोप लगाया कि संबंधित आदेश विधि विरुद्ध, मनमाना और जल्दबाजी में जारी किया गया है।
आरोपों के आधार पर विभाग ने तीनों अन्नपूर्णा रसोईयों के अनुबंध निरस्त करने, संस्था को ब्लैकलिस्ट करने और प्रत्येक रसोई पर एक लाख रुपए की पेनल्टी लगाने का आदेश दिया था।
व्यक्तिगत सुनवाई का मौका नहीं देने का आरोप
याचिकाकर्ता की ओर से कोर्ट में कहा गया कि संस्था की ओर से संचालित रसोईयों में किसी तरह की अनियमितता नहीं की गई थी और पहले संचालन को लेकर प्रशंसा पत्र भी जारी किया जा चुका था।
अधिवक्ताओं ने दलील दी कि संस्था की संचालिका को व्यक्तिगत सुनवाई का पर्याप्त अवसर दिए बिना ही रसोई बंद करने, ब्लैकलिस्ट करने और जुर्माना लगाने का आदेश जारी कर दिया गया।
याचिका में संबंधित आदेशों के क्रियान्वयन पर रोक लगाने की मांग की गई।
हाईकोर्ट ने चार सप्ताह में मांगा जवाब
मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति शुभा मेहता के समक्ष हुई। सुनवाई के बाद कोर्ट ने तीनों अन्नपूर्णा रसोईयों को बंद करने संबंधी आदेश के क्रियान्वयन पर रोक लगा दी।
साथ ही संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी करते हुए चार सप्ताह में जवाब पेश करने के निर्देश दिए गए हैं।
इस आदेश के बाद फिलहाल चिड़ावा और सुल्ताना में संस्था द्वारा संचालित तीन अन्नपूर्णा रसोईयों को बंद करने की कार्रवाई पर रोक रहेगी।






