ब्रह्माकुमारीज संस्थान द्वारा संचालित नशा मुक्त भारत अभियान के तहत झुंझुनूं कारागृह में एक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में माउंट आबू से आए वरिष्ठ राजयोग शिक्षक बीके भगवान भाई ने बंदियों को आत्मपरिवर्तन, सकारात्मक सोच और आध्यात्मिक जीवन का संदेश दिया।
उन्होंने कहा कि कारागृह केवल दंड का स्थान नहीं, बल्कि स्वयं को सुधारने का अवसर भी है।
“दूसरों से नहीं, स्वयं से करें बदलाव की शुरुआत”
बीके भगवान भाई ने कहा कि व्यक्ति को बदला लेने के बजाय स्वयं को बदलने का प्रयास करना चाहिए। उनके अनुसार, प्रतिशोध की भावना समस्याओं को बढ़ाती है, जबकि आत्मचिंतन और आत्मसुधार जीवन को नई दिशा देते हैं।
उन्होंने बंदियों से अपने जीवन के उद्देश्य, कर्म और व्यवहार पर विचार करने का आह्वान करते हुए कहा कि आत्ममंथन से संस्कारों और व्यवहार में सकारात्मक परिवर्तन आता है।
विपरीत परिस्थितियों में धैर्य रखने का संदेश
कार्यक्रम में जेलर मनोहर सिंह ने कहा कि जीवन की प्रत्येक घटना के पीछे कोई न कोई सकारात्मक सीख छिपी होती है। उन्होंने बंदियों से विपरीत परिस्थितियों में तनावमुक्त रहकर धैर्य और संयम के साथ आगे बढ़ने की अपील की।
वहीं, बीके साक्षी बहन ने कहा कि मनुष्य जब स्वयं और परमात्मा को भूल जाता है, तभी उससे गलतियां होने लगती हैं। उन्होंने कर्म और उसके फल के सिद्धांत पर भी प्रकाश डाला।
राजयोग मेडिटेशन कराया, नशामुक्ति की दिलाई शपथ
बीके प्रवीण कुमार ने जीवन में आध्यात्मिक ज्ञान के महत्व पर बल देते हुए कहा कि इससे भविष्य में गलतियों से बचा जा सकता है।
कार्यक्रम के अंत में बीके भगवान भाई ने उपस्थित बंदियों को राजयोग मेडिटेशन का अभ्यास कराया तथा सभी को नशामुक्ति की प्रतिज्ञा दिलाई।






