चिड़ावा। मानसून के दौरान जहां एक ओर पर्यावरण संरक्षण और वृक्षारोपण अभियान चलाए जा रहे हैं, वहीं चिड़ावा में सरकारी भवनों की दीवारों और छतों पर उग आए पेड़-पौधे अब भवनों की सुरक्षा के लिए चिंता का विषय बन गए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि समय रहते इन्हें नहीं हटाया गया तो इमारतों को गंभीर नुकसान हो सकता है।
दीवारों और छतों पर उगी वनस्पति से बढ़ा खतरा
शहर के जलदाय विभाग और उपजिला अस्पताल की इमारतों की दीवारों व छतों पर उगे पेड़-पौधों की जड़ों के कारण कई स्थानों पर दरारें दिखाई देने लगी हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि लगातार बढ़ रही वनस्पति से भवनों की मजबूती प्रभावित हो रही है।
पहले से जर्जर भवनों को और नुकसान की आशंका
स्थानीय नागरिकों के अनुसार संबंधित सरकारी भवन पहले से ही जर्जर स्थिति में हैं। ऐसे में यदि दीवारों और छतों पर उगे पेड़-पौधों को समय पर नहीं हटाया गया, तो बारिश के मौसम में भवनों को और अधिक नुकसान पहुंच सकता है तथा भविष्य में हादसे की आशंका भी बढ़ सकती है।
लोगों ने उठाए सवाल, विभागों से की कार्रवाई की मांग
इस स्थिति पर स्थानीय लोगों ने कटाक्ष करते हुए कहा कि ऐसा प्रतीत होता है मानो भवनों पर ही वृक्षारोपण होने दिया गया हो। उनका कहना है कि पर्यावरण संरक्षण आवश्यक है, लेकिन इसके लिए उचित स्थान का चयन भी उतना ही जरूरी है, ताकि हरियाली बढ़ाने के साथ सरकारी संपत्तियों की सुरक्षा भी सुनिश्चित की जा सके।
स्थानीय नागरिकों ने संबंधित विभागों से मांग की है कि भवनों पर उगे पेड़-पौधों को शीघ्र हटाकर आवश्यक मरम्मत कराई जाए, जिससे भवनों को होने वाले संभावित नुकसान और किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके।






