चिड़ावा। सामाजिक सुधार की दिशा में एक प्रेरणादायक पहल करते हुए चिड़ावा के निकट पिचानवां खुर्द गांव में दहेज रहित विवाह का अनूठा उदाहरण देखने को मिला। समाज के वरिष्ठ लोगों की पहल और दोनों परिवारों की सहमति से गोद कार्यक्रम के दौरान ही दहेज रहित एवं सादगीपूर्ण विवाह का निर्णय लिया गया। इसके बाद उसी रात पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ विवाह संपन्न कराया गया।
गोद कार्यक्रम के दौरान लिया गया निर्णय
जानकारी के अनुसार, 19 जुलाई को पिचानवां खुर्द निवासी विजेंद्र शास्त्री की पुत्री एवं चिकित्सक डॉ. वेनु चाहर के गोद कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। कार्यक्रम के दौरान समाज के गणमान्य लोग जाजम पर एकत्रित हुए। चर्चा के दौरान समाज हित में दहेज रहित और सादगीपूर्ण विवाह कराने का प्रस्ताव रखा गया, जिस पर दोनों परिवारों ने सहमति व्यक्त की।
इसके बाद बिना किसी दिखावे और दहेज के उसी रात विवाह संपन्न कराने का निर्णय लिया गया।
वर-वधू ने भी दी सहमति
समाज के निर्णय के बाद वर हेमंत और वधू डॉ. वेनु चाहर से उनकी सहमति ली गई। दोनों ने समाज के सामूहिक निर्णय का सम्मान करते हुए विवाह के लिए अपनी स्वीकृति दी। इसके बाद सादगीपूर्ण वातावरण में वैवाहिक रस्में पूरी कराई गईं।
समाज के लोगों ने निभाई सक्रिय भूमिका
इस सामाजिक पहल को सफल बनाने में लड़की पक्ष की ओर से महेंद्र सिंह, मानसिंह, रतनसिंह काकोड़ा, कैप्टन श्रीचंद चाहर, राजपाल सिंह, सुमेर मास्टर, रोहिताश चाहर, दलीप सिंह, होशियार सिंह, धर्मपाल कंडेक्टर, प्यारेलाल चाहर और महेश चाहर सहित कई समाजबंधुओं ने सक्रिय भूमिका निभाई।
कार्यक्रम का संयोजन दिनेश कुमार बुगालिया गिडानिया ने किया। वहीं लड़के पक्ष की ओर से गोपालपुरा (सूरजगढ़) निवासी राजवीर भाम्भू मास्टर ने अपने पुत्र हेमंत की सहमति के बाद इस निर्णय का समर्थन किया।
दहेज प्रथा के खिलाफ दिया सकारात्मक संदेश
विवाह के दौरान सभी पारंपरिक रस्में सादगी के साथ संपन्न कराई गईं। राजेश जांगिड़ की पुत्री अलका जांगिड़ ने पारंपरिक बनोरा की रस्म निभाई।
इस पहल के माध्यम से समाज ने दहेज प्रथा और विवाह में होने वाली फिजूलखर्ची के विरुद्ध सकारात्मक संदेश दिया। समाज के लोगों ने उम्मीद जताई कि भविष्य में भी ऐसे निर्णय अन्य परिवारों के लिए प्रेरणा बनेंगे और सादगीपूर्ण एवं दहेज रहित विवाह को बढ़ावा मिलेगा।






