चिड़ावा। आयकर विभाग से जुड़े एक मामले में राष्ट्रीय फेसलेस अपील केंद्र (NFAC) ने करदाता की अपील स्वीकार करते हुए विभाग द्वारा की गई विभिन्न बढ़ोतरी को हटाने का आदेश दिया है। आदेश 23 सितंबर 2026 को पारित किया गया।
आकलन वर्ष 2018-19 से संबंधित इस मामले में कुल 3,29,97,846 रुपये की बढ़ोतरी की गई थी।
तीन प्रमुख मदों में हुई थी बढ़ोतरी
मामले में आयकर विभाग की ओर से धारा 40(a)(ia) के तहत 76,86,610 रुपये की बढ़ोतरी की गई थी।
इसके अलावा धारा 68 के तहत असुरक्षित ऋण के रूप में 1,89,86,236 रुपये तथा 63,25,000 रुपये की अन्य बढ़ोतरी शामिल थी।
दस्तावेज और कानूनी तर्क प्रस्तुत किए
करदाता की ओर से कर अधिवक्ता विक्रम सिंह शेखावत ने अपील की पैरवी करते हुए विस्तृत दस्तावेज और कानूनी तर्क प्रस्तुत किए।
पैरवी के दौरान सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालयों के प्रासंगिक निर्णयों का भी हवाला दिया गया। इनमें करदाता द्वारा लेन-देन से संबंधित पहचान, लेन-देन की वास्तविकता और बैंकिंग माध्यम से हुए लेन-देन से जुड़े न्यायिक सिद्धांतों को आधार बनाया गया।
समय पर TDS जमा करने और बैंकिंग लेन-देन को माना महत्वपूर्ण
अपीलीय प्राधिकारी ने प्रस्तुत दस्तावेजों और कानूनी तथ्यों पर विचार किया। आदेश में समय पर TDS जमा किए जाने तथा ऋण से संबंधित लेन-देन के बैंकिंग माध्यम से होने को भी महत्वपूर्ण माना गया।
इसके बाद करदाता की अपील स्वीकार करते हुए प्रमुख बढ़ोतरी हटाने का आदेश पारित किया गया।
3.29 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी से मिली राहत
आदेश के परिणामस्वरूप करदाता को 3,29,97,846 रुपये की की गई बढ़ोतरी से राहत मिली। यह मामला कर अधिवक्ता विक्रम सिंह शेखावत की ओर से की गई कानूनी एवं कर संबंधी पैरवी के परिणाम के रूप में सामने आया है।






