चिड़ावा, डांगावास दलित हत्याकांड के मामले में निचली अदालत के फैसले के खिलाफ उच्च न्यायालय में प्रभावी पैरवी की मांग को लेकर भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) ने मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा।
पार्टी के जिला सचिव कामरेड रामचंद्र कुलहरि के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने चिड़ावा उपखंड अधिकारी को यह ज्ञापन दिया।
2015 के डांगावास कांड का मामला
ज्ञापन में कहा गया कि वर्ष 2015 में नागौर जिले के डांगावास में हिंसक घटना हुई थी, जिसमें पार्टी के अनुसार पांच दलित लोगों की हत्या हुई थी और कई लोग घायल हुए थे।
प्रतिनिधिमंडल ने आरोप लगाया कि घटना के मामले में 40 अभियुक्तों को अदालत ने बरी कर दिया है।
40 अभियुक्तों के बरी होने पर उठाए सवाल
प्रतिनिधिमंडल के अनुसार एससी-एसटी विशिष्ट न्यायालय, मेड़ता सिटी के सत्र न्यायाधीश ने सबूतों के अभाव और अभियोजन पक्ष की कमजोरियों के आधार पर सभी 40 अभियुक्तों को दोषमुक्त कर दिया।
पार्टी ने इस फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि जिन लोगों की हत्या हुई और जो गंभीर रूप से घायल हुए, उनके साथ हुई घटना के लिए जिम्मेदारी तय होना जरूरी है।
राज्य सरकार से हाईकोर्ट में मजबूत पैरवी की मांग
ज्ञापन के माध्यम से मांग की गई कि राज्य सरकार निचली अदालत के निर्णय के खिलाफ उच्च न्यायालय में प्रभावी और मजबूत पैरवी करे।
प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि मामले में पीड़ित पक्ष को न्याय दिलाने के लिए सरकार को कानूनी स्तर पर आवश्यक कदम उठाने चाहिए।
प्रतिनिधिमंडल में ये लोग रहे शामिल
ज्ञापन सौंपने वाले प्रतिनिधिमंडल में पार्टी के राज्य समिति सदस्य कामरेड ओमप्रकाश झारोड़ा, कामरेड रत्तीराम राव, कामरेड हरी ओम, बलवान बलौदा और बंटी शामिल रहे।
पार्टी ने सरकार से मामले में उच्च न्यायालय स्तर पर उचित कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की है।






