झुंझुनूं जिले में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना (NFSA) के तहत 122 राशन कार्डों को प्राथमिकता परिवार (पीएचएच) से अंत्योदय अन्न योजना (एएवाई) श्रेणी में नियम विरुद्ध तरीके से बदलने का मामला सामने आया है।

प्राथमिक जांच में पात्रता से संबंधित वैध दस्तावेज नहीं मिलने पर जिला कलेक्टर डॉ. अरुण गर्ग ने राशन कार्ड और संबंधित ई-मित्र आईडी की जांच के निर्देश दिए हैं।

नोटिस पाने वाले कार्डधारियों को 7 दिन में दस्तावेजों सहित स्पष्टीकरण देना होगा। ऐसा नहीं करने पर गेहूं की राशि 30.57 रुपए प्रति किलो की दर से वसूल की जाएगी।

पीएचएच से एएवाई में नियम विरुद्ध बदले गए 122 कार्ड

झुंझुनूं में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना के तहत राशन कार्डों की श्रेणी बदलने में गड़बड़ी का मामला सामने आया है। जिले में 122 राशन कार्डों को प्राथमिकता परिवार (PHH) श्रेणी से अंत्योदय अन्न योजना (AAY) श्रेणी में परिवर्तित किया गया।

प्राथमिक जांच में सामने आया कि कई मामलों में अंत्योदय श्रेणी में चयन के लिए जरूरी पात्रता दस्तावेज आवेदन के साथ संलग्न नहीं किए गए थे।

कुछ आवेदन अपूर्ण पाए गए। वहीं, अन्य संशोधनों के साथ राशन कार्ड की श्रेणी में भी बदलाव किया गया।

मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला कलेक्टर डॉ. अरुण गर्ग ने संबंधित राशन कार्डों और ई-मित्र आईडी की जांच के निर्देश दिए हैं।

नगर निकाय और पंचायत समिति के कार्मिकों की भूमिका भी जांच के घेरे में

जांच में यह भी सामने आया कि कुछ राशन कार्डों के अनुमोदन के दौरान संबंधित नगर निकाय और पंचायत समिति के कार्मिकों ने अंत्योदय श्रेणी की पात्रता और जरूरी दस्तावेजों की जांच किए बिना श्रेणी परिवर्तन को मंजूरी दी।

अब इन प्रकरणों में संबंधित कार्मिकों की भूमिका की भी जांच की जाएगी।

कलेक्टर के निर्देश पर संबंधित राशन कार्डों और ई-मित्र आईडी की सूची सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभाग, विकास अधिकारियों तथा नगर निकाय अधिकारियों को भेज दी गई है।

अधिकारियों को आवेदन पत्र, संलग्न दस्तावेज, श्रेणी परिवर्तन की प्रक्रिया और अनुमोदन से जुड़े रिकॉर्ड की जांच करने के निर्देश दिए गए हैं।

कार्डधारियों को 7 दिन में देना होगा जवाब

जिला रसद अधिकारी संदीप गौड़ के अनुसार संबंधित राशन कार्डधारियों को नोटिस जारी कर दिए गए हैं।

नोटिस मिलने के बाद 7 दिन के भीतर जिला रसद कार्यालय में उपस्थित होकर वैध दस्तावेजों के साथ स्पष्टीकरण देना होगा।

यदि निर्धारित अवधि में पात्रता से जुड़े दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए गए तो संबंधित कार्डधारी से गेहूं की राशि 30.57 रुपए प्रति किलो की दर से वसूल की जाएगी।

ई-मित्र संचालकों पर भी होगी कार्रवाई

मामले में ई-मित्र संचालकों की भूमिका भी जांची जा रही है।

विभाग ने निर्देश दिए हैं कि अंत्योदय श्रेणी के लिए आवेदन केवल वैध और पात्रता साबित करने वाले दस्तावेजों के आधार पर ही करवाए जाएं।

यदि जांच में किसी ई-मित्र संचालक की लापरवाही या अनियमितता सामने आती है तो उसके खिलाफ नियमों के तहत कार्रवाई की जाएगी।

अंत्योदय कार्ड में ज्यादा गेहूं मिलने से बढ़ा मामला

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना में सामान्य एपीएल/बीपीएल परिवारों को प्रति सदस्य प्रतिमाह 5 किलो गेहूं मिलता है।

वहीं, अंत्योदय परिवार को प्रति राशन कार्ड 35 किलो गेहूं दिया जाता है।

यानी एएवाई श्रेणी में आने वाले परिवार को कार्ड के आधार पर अधिक मात्रा में गेहूं मिलता है। ऐसे में अधिक खाद्यान्न का लाभ लेने के उद्देश्य से राशन कार्ड की श्रेणी में नियम विरुद्ध बदलाव किए जाने की आशंका सामने आई है।

बताया गया है कि संबंधित श्रेणी परिवर्तन फरवरी-मार्च 2025 के दौरान करवाए गए थे।

उदयपुरवाटी में सबसे ज्यादा 50 मामले

122 संदिग्ध प्रकरणों में सबसे ज्यादा मामले विकास अधिकारी, उदयपुरवाटी के क्षेत्र से सामने आए हैं।

यहां 50 राशन कार्ड जांच के दायरे में हैं।

इसके बाद नगरपालिका नवलगढ़ में 30 और विकास अधिकारी, नवलगढ़ के क्षेत्र में 22 मामले सामने आए हैं।

बाकी प्रकरण जिले की अन्य पंचायत समितियों और नगर निकायों से संबंधित हैं।

कहां कितने मामले सामने आए?

क्रमअधिकृत अधिकारीप्रकरण
1विकास अधिकारी, खेतड़ी1
2विकास अधिकारी, बुहाना2
3विकास अधिकारी, सिंघाना1
4विकास अधिकारी, पिलानी1
5विकास अधिकारी, सूरजगढ़1
6विकास अधिकारी, चिड़ावा4
7विकास अधिकारी, मंडावा3
8विकास अधिकारी, नवलगढ़22
9अधिकारी, नगरपालिका नवलगढ़30
10विकास अधिकारी, उदयपुरवाटी50
11नगरपालिका उदयपुरवाटी7
कुल122

अब रिकॉर्ड की होगी पूरी जांच

प्रशासन की कार्रवाई के बाद अब इन 122 मामलों में यह जांच होगी कि संबंधित परिवार वास्तव में अंत्योदय श्रेणी की पात्रता रखते थे या नहीं।

इसके साथ ही आवेदन में लगाए गए दस्तावेज, ई-मित्र के माध्यम से आवेदन की प्रक्रिया, राशन कार्ड में किए गए संशोधन और संबंधित अधिकारी-कर्मचारी द्वारा दिए गए अनुमोदन की भी जांच की जाएगी।

यदि जांच में अनियमितता प्रमाणित होती है तो लाभार्थी से अतिरिक्त गेहूं की राशि की वसूली के साथ जिम्मेदार ई-मित्र संचालक और संबंधित कार्मिकों के खिलाफ भी कार्रवाई हो सकती है।

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