झुंझुनूं। आगामी जनगणना में जातियों की गणना वैज्ञानिक, प्रमाणिक, पारदर्शी और व्यवस्थित तरीके से कराने की मांग को लेकर कांग्रेस OBC विभाग की ओर से गुरुवार को जिला कलेक्टर को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा गया।
राष्ट्रीय कांग्रेस OBC विभाग के अध्यक्ष डॉ. अनिल जय हिंद के आह्वान और प्रदेश कांग्रेस OBC विभाग के अध्यक्ष हरसहाय यादव के निर्देशानुसार जिला कांग्रेस कमेटी OBC विभाग के जिलाध्यक्ष संतोष सैनी के नेतृत्व में ज्ञापन प्रस्तुत किया गया।
इस दौरान कांग्रेस विधि विभाग के जिलाध्यक्ष एडवोकेट नवीन सैनी, OBC विभाग के जिला महासचिव मोहम्मद यूसुफ, जिला सचिव गजानंद सैनी, मुकेश सैनी, निरंजन कुमार सहित कार्यकर्ता मौजूद रहे।
भारत सरकार ने Census 2027 में जाति गणना शामिल करने का निर्णय लिया है। केंद्र सरकार के अनुसार जाति से जुड़े प्रश्न जनगणना के दूसरे चरण यानी Population Enumeration में शामिल किए जाएंगे और संबंधित प्रश्नों को दूसरे चरण की शुरुआत से पहले अधिसूचित किया जाएगा।
जातियों की सही पहचान और वैज्ञानिक वर्गीकरण की मांग
ज्ञापन में मांग की गई कि जाति जनगणना के दौरान प्रत्येक जाति एवं समुदाय की सही पहचान, प्रमाणिक आंकड़े और वैज्ञानिक वर्गीकरण सुनिश्चित करने के लिए ठोस एवं मानकीकृत व्यवस्था लागू की जाए।
ज्ञापन में कहा गया कि भारत की सामाजिक संरचना विविध है। एक ही जाति या समुदाय के अलग-अलग राज्यों और क्षेत्रों में अलग-अलग नाम, उपनाम एवं स्थानीय पहचान प्रचलित हो सकती है। ऐसे में केवल प्रचलित नाम के आधार पर आंकड़े दर्ज किए जाने पर वास्तविक जनसंख्या का सही आकलन प्रभावित हो सकता है।
कांग्रेस OBC विभाग ने प्रत्येक मान्यता प्राप्त जाति के लिए विशिष्ट वैज्ञानिक कोड, राज्यवार मानकीकृत जाति मास्टर लिस्ट और प्रमाणित पर्यायवाची नामों को जोड़ने के लिए Searchable Drop-down Menu की व्यवस्था करने की मांग रखी।
इसके साथ ही विशेषज्ञों की निगरानी में जातिगत आंकड़ों के वैज्ञानिक वर्गीकरण की व्यवस्था करने का सुझाव दिया गया।
सामाजिक न्याय और नीति-निर्माण के लिए सही आंकड़ों पर जोर
जिलाध्यक्ष संतोष सैनी ने कहा कि जाति जनगणना महज संख्या दर्ज करने की प्रक्रिया नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय, समान अवसर और प्रभावी नीति-निर्माण का महत्वपूर्ण आधार है।
उन्होंने कहा कि शिक्षा, रोजगार, आर्थिक स्थिति, प्रतिनिधित्व और कल्याणकारी योजनाओं से संबंधित नीतियां वास्तविक आंकड़ों के आधार पर अधिक प्रभावी ढंग से तैयार की जा सकती हैं।
संतोष सैनी ने कहा कि यदि आंकड़ों के संकलन में जातियों के नाम, पर्यायवाची पहचान और क्षेत्रीय विविधताओं को वैज्ञानिक तरीके से दर्ज नहीं किया गया तो वास्तविक सामाजिक स्थिति का सही आकलन कठिन हो सकता है।
तेलंगाना के SEEEPC सर्वे के अनुभवों का अध्ययन करने की मांग
ज्ञापन में तेलंगाना के Socio-Economic, Educational, Employment, Political and Caste (SEEEPC) Survey-2024 के अनुभवों का अध्ययन कर उपयोगी प्रक्रियाओं को राष्ट्रीय स्तर की जाति गणना में अपनाने का सुझाव दिया गया।
तेलंगाना के आधिकारिक दस्तावेज के अनुसार SEEEPC सर्वे में परिवार स्तर पर सामाजिक, आर्थिक, शैक्षणिक, रोजगार, जाति और अन्य पहलुओं से जुड़ी जानकारी जुटाई गई थी। आधिकारिक रिपोर्ट में 242 जाति समूहों के विकल्प का भी उल्लेख है।
विशेषज्ञ समिति गठित करने की मांग
कांग्रेस OBC विभाग ने समाजशास्त्र, मानवशास्त्र, जनसांख्यिकी, Census एवं Data Management, संविधान और सामाजिक न्याय सहित विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों की उच्चस्तरीय विशेषज्ञ समिति गठित करने की मांग की।
संतोष सैनी ने कहा, “सही गणना, सही आंकड़े और सही हिस्सेदारी ही सामाजिक न्याय की मजबूत बुनियाद है।”
उन्होंने कहा कि जाति जनगणना की प्रक्रिया में हर जाति और समुदाय की पहचान सही तरीके से दर्ज हो तथा आंकड़ों में पारदर्शिता, प्रमाणिकता और वैज्ञानिकता बनी रहे।
ज्ञापन में केंद्र सरकार से मांग की गई कि आगामी जाति जनगणना की प्रक्रिया में वैज्ञानिक मानकों, आधुनिक डिजिटल तकनीक, विशेषज्ञ निगरानी और पारदर्शी डेटा प्रबंधन को शामिल किया जाए, ताकि प्राप्त आंकड़े भविष्य की नीतियों और सामाजिक न्याय से जुड़ी योजनाओं के लिए विश्वसनीय आधार बन सकें।






