राष्ट्रीय लोक अदालत से पहले हर लंबित मामले की होगी प्री-काउंसलिंग
झुंझुनूं के जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने लंबित मामलों के त्वरित निस्तारण के लिए बड़ा अभियान शुरू किया है।
“कंज्यूमर्स वॉइस जागरूकता अभियान” के तहत आयोग ने इस वर्ष दर्ज होने वाले मामलों के साथ-साथ पुराने मुकदमों के 500 फीसदी निस्तारण का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है।
आयोग सदस्य प्रमेंद्र कुमार सैनी ने बताया कि यह निर्णय आयोग अध्यक्ष मनोज कुमार मील के निर्देशन में लिया गया है।
लोक अदालत से पहले होगी अनिवार्य प्री-काउंसलिंग
सैनी ने जानकारी दी कि मार्च में आयोजित होने वाली प्रथम राष्ट्रीय लोक अदालत से पहले प्रत्येक लंबित उपभोक्ता प्रकरण को प्री-काउंसलिंग से गुजारा जाएगा।
इस प्रक्रिया का उद्देश्य है कि अधिकतम मामलों का आपसी सहमति से समाधान हो सके।
उन्होंने कहा,
“हमारा प्रयास है कि उपभोक्ताओं को त्वरित और सुलभ न्याय मिले। जिन मामलों में समझौता संभव होगा, उन्हें लोक अदालत में प्राथमिकता दी जाएगी।”
12 फरवरी से ‘न्याय टेबल’ पर सुनवाई
12 फरवरी से आयोग अध्यक्ष के निर्देशन में प्रत्येक फाइल की ‘न्याय टेबल’ पर प्री-काउंसलिंग अनिवार्य कर दी गई है।
इसके लिए परिवादी, विभागीय अधिकारी और अधिवक्ताओं को सूचना दी जा रही है, ताकि सभी पक्ष समय पर उपस्थित होकर मामलों के शीघ्र समाधान में सहयोग करें।
विश्व उपभोक्ता दिवस तक विशेष अभियान
आयोग का लक्ष्य है कि 15 मार्च (विश्व उपभोक्ता दिवस) तक पुराने मामलों का अधिकतम निस्तारण किया जाए।
जो प्रकरण समझौते से नहीं सुलझेंगे, उनमें आवश्यक कानूनी कार्यवाही पूरी कर अंतिम निर्णय तक पहुंचाया जाएगा।
आयोग का उद्देश्य झुंझुनूं उपभोक्ता आयोग को एक मॉडल आयोग के रूप में स्थापित करना है।
ई-जागृति प्लेटफॉर्म का होगा प्रचार-प्रसार
अभियान के तहत ई-जागृति प्लेटफॉर्म की जानकारी का व्यापक प्रचार किया जाएगा।
इसके लिए स्लोगन, स्टिकर, रंगोली, उपभोक्ता अधिकार एवं दायित्व विषयक कार्यशालाएं, मीडिया संवाद और अधिवक्ताओं के साथ बैठकें आयोजित होंगी।
आयोग का मानना है कि जागरूक उपभोक्ता ही अपने अधिकारों की प्रभावी रक्षा कर सकता है।
झुंझुनूं के उपभोक्ताओं को क्या होगा फायदा?
- लंबित मामलों का त्वरित निस्तारण
- लोक अदालत के माध्यम से कम समय में समाधान
- उपभोक्ता अधिकारों की बढ़ती जागरूकता
- डिजिटल प्लेटफॉर्म से शिकायत दर्ज करने में सुविधा
झुंझुनूं के उपभोक्ताओं के लिए यह पहल न्याय प्रणाली में पारदर्शिता और गति दोनों बढ़ाने वाली मानी जा रही है।
