झुंझुनूं, बीमा क्लेम के मामलों में सर्वेयर की अंतिम रिपोर्ट मिलने के बाद बीमा कंपनी को निर्धारित अवधि में दावे पर निर्णय लेना जरूरी है। इसी सिद्धांत के आधार पर जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, झुंझुनूं ने बोलेरो चोरी से जुड़े मामले में बीमा कंपनी के खिलाफ फैसला सुनाया।
आयोग ने माना कि सर्वेयर की रिपोर्ट मिलने के बावजूद क्लेम को लंबे समय तक लंबित रखना सेवा में दोष और अनुचित व्यापार-प्रथा की श्रेणी में आता है।
जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के अध्यक्ष एवं पीठासीन अधिकारी मनोज कुमार मील तथा सदस्य प्रमेन्द्र कुमार सैनी ने उपभोक्ता के पक्ष में निर्णय सुनाया।
बीमा कंपनी को 4.80 लाख रुपए और 9% ब्याज देना होगा
आयोग ने यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड को बीमित वाहन की राशि 4 लाख 80 हजार रुपए अदा करने के आदेश दिए हैं।
इस राशि पर 29 जनवरी 2025 से वास्तविक भुगतान तक 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा।
इसके अलावा उपभोक्ता को हुए मानसिक संताप के लिए 1 लाख 35 हजार रुपए तथा परिवाद व्यय के रूप में 10,500 रुपए देने के निर्देश दिए गए हैं।
कंपनी को आदेश की पालना 45 दिन के भीतर करनी होगी। निर्धारित अवधि में भुगतान नहीं होने पर आदेश के अनुसार 12.5 प्रतिशत वार्षिक ब्याज लागू होगा।
क्या है पूरा मामला?
मामला एक बोलेरो वाहन की चोरी से जुड़ा है। वाहन की बीमा पॉलिसी 28 नवंबर 2023 से 27 नवंबर 2024 तक प्रभावी थी।
वाहन 23 नवंबर 2024 की रात करीब 11:45 बजे चोरी हो गया। घटना के संबंध में 24 नवंबर 2024 को खेतड़ी नगर थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई।
परिवादी ने बीमा कंपनी को चोरी की सूचना देने के बाद 26 नवंबर 2024 को क्लेम आवेदन प्रस्तुत किया।
पुलिस जांच में वाहन चोरी होना प्रमाणित पाया गया। पुलिस की अंतिम जांच रिपोर्ट को न्यायिक मजिस्ट्रेट, खेतड़ी ने 16 जनवरी 2025 को स्वीकार कर लिया।
सर्वेयर ने 29 जनवरी 2025 को दी रिपोर्ट
मामले की जांच के बाद बीमा कंपनी के सर्वेयर ने 29 जनवरी 2025 को अपनी रिपोर्ट बीमा कंपनी को सौंप दी।
रिपोर्ट के साथ एफआईआर की प्रमाणित प्रति और न्यायालय द्वारा पुलिस की अंतिम रिपोर्ट स्वीकार किए जाने का आदेश भी उपलब्ध था।
इसके बावजूद बीमा कंपनी ने क्लेम का समयबद्ध निस्तारण नहीं किया। आयोग ने सर्वेयर रिपोर्ट मिलने से निर्णय तक हुई 572 दिन की देरी को गंभीर विधिक त्रुटि और सेवा दोष माना।
बीमा कंपनी की आपत्तियां आयोग ने नहीं मानीं
बीमा कंपनी की ओर से एफआईआर में कथित देरी, घटना की सूचना में विलंब और दस्तावेजों की उपलब्धता को लेकर आपत्तियां उठाई गई थीं।
आयोग ने इन तर्कों को स्वीकार नहीं किया। रिकॉर्ड के अनुसार चोरी 23 नवंबर की रात हुई और एफआईआर अगले दिन यानी 24 नवंबर को दर्ज की गई थी।
आयोग ने यह भी माना कि बीमा कंपनी के पास एफआईआर, न्यायालय का आदेश और सर्वेयर रिपोर्ट जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेज उपलब्ध थे। इसके बावजूद क्लेम को लंबे समय तक लंबित रखा गया।
सुप्रीम कोर्ट और राष्ट्रीय आयोग के फैसलों का हवाला
आयोग ने अपने निर्णय में सुप्रीम कोर्ट और राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग के न्यायिक दृष्टांतों का उल्लेख किया।
निर्णय में United India Insurance Co. Ltd. बनाम MKJ Corporation सहित अन्य मामलों का संदर्भ देते हुए बीमा दावों के निस्तारण में सद्भावना, निष्पक्षता और समयबद्धता के महत्व को रेखांकित किया गया।
आयोग ने यह भी माना कि बीमा कंपनी का दायित्व केवल प्रीमियम लेना नहीं है, बल्कि वैध दावा प्रस्तुत होने पर उसका निष्पक्ष और समयबद्ध निस्तारण करना भी है।
सर्वेयर रिपोर्ट की तारीख से ही ब्याज
आयोग ने राजस्थान राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के दृष्टिकोण का भी संदर्भ लिया, जिसमें सर्वेयर रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद अनावश्यक देरी होने पर उस अवधि के लिए उपभोक्ता को ब्याज दिए जाने के सिद्धांत को महत्व दिया गया था।
इसी आधार पर वर्तमान मामले में भी 29 जनवरी 2025, यानी जिस दिन सर्वेयर की रिपोर्ट बीमा कंपनी को प्राप्त हुई, उसी तारीख से ब्याज देने का आदेश दिया गया।
बीमा उपभोक्ताओं के लिए महत्वपूर्ण संदेश
इस फैसले से यह संदेश मिलता है कि सर्वेयर रिपोर्ट मिलने के बाद बीमा क्लेम को अनिश्चितकाल तक लंबित नहीं रखा जा सकता।
यदि वैध बीमा दावा आवश्यक दस्तावेजों के बावजूद अनावश्यक रूप से लंबित रखा जाता है तो उपभोक्ता आयोग परिस्थितियों के अनुसार बीमा राशि, ब्याज, मानसिक संताप और परिवाद व्यय जैसी राहत दे सकता है।
झुंझुनूं उपभोक्ता आयोग का यह फैसला बीमा क्लेम के समयबद्ध निस्तारण और उपभोक्ताओं के अधिकारों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।






