झुंझुनूं, लोकमंथन लोक दर्शन यात्रा जिले के खांदवा गांव पहुंची, जहां ग्रामीणों ने उत्साह और आत्मीयता के साथ यात्रा का भव्य स्वागत किया।

पारंपरिक लोक संस्कृति और ग्रामीण परिवेश के बीच आयोजित कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए। यात्रा में आए लोगों को ऊंटगाड़ी में बैठाकर गांव का भ्रमण करवाया गया।

इस दौरान यात्रियों को गांव में किए गए पौधरोपण, जल संरक्षण और स्वच्छता से जुड़े कार्यों की जानकारी दी गई।

ऊंटगाड़ी से कराया ग्राम दर्शन

गांव के भ्रमण के दौरान यात्रियों को खांदवा की प्राकृतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक विशेषताओं से रूबरू करवाया गया।

गांव में लगाए गए पेड़-पौधों, जल संरक्षण के प्रयासों और स्वच्छता से जुड़े कार्यों के बारे में भी जानकारी दी गई। ग्रामीणों ने पारंपरिक अंदाज में अतिथियों और यात्रियों का स्वागत किया।

लोकगीत और लोक नृत्य ने बांधा समां

कार्यक्रम में ग्रामीण कलाकारों ने विभिन्न लोकगीत, लोक नृत्य और पारंपरिक सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। लोक संस्कृति की प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम में ग्रामीण परिवेश की जीवंत छटा बिखेर दी।

ग्रामीणों ने भी पूरे उत्साह के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आनंद लिया। यात्रा के उद्देश्य और गतिविधियों को लेकर ग्रामीणों में उत्सुकता रही तथा उन्होंने यात्रियों और आयोजकों से जानकारी ली।

महिलाओं ने उत्साह से लगाई मटका दौड़

कार्यक्रम में महिलाओं की भागीदारी विशेष रूप से उल्लेखनीय रही। ग्रामीण महिलाओं ने उत्साहपूर्वक मटका दौड़ में हिस्सा लिया।

पारंपरिक खेल के आयोजन से कार्यक्रम में उत्साह और उल्लास का माहौल बना। महिलाओं की भागीदारी को ग्रामीणों ने भी खूब सराहा।

डॉ. सत्यनारायण कुमावत ने बताया यात्रा का उद्देश्य

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ. सत्यनारायण कुमावत ने लोकमंथन यात्रा के उद्देश्य और इसकी प्रासंगिकता के बारे में जानकारी दी।

उन्होंने लोक संस्कृति, सामाजिक सरोकार, पर्यावरण संरक्षण, जल संरक्षण और सामुदायिक सहभागिता के महत्व पर प्रकाश डाला।

उन्होंने कहा कि लोकमंथन जैसे आयोजनों के माध्यम से समाज की लोक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का कार्य होता है। ऐसे आयोजनों से ग्रामीणों को अपनी परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ने का अवसर मिलता है।

महाविद्यालय में ‘गीतों री फुलवारी’ का विमोचन

यात्रा के जिला समन्वयक एवं जिला साक्षरता अधिकारी योगेंद्र सैनी ने बताया कि खांदवा पहुंचने से पहले राजकीय एनएमटी कन्या महाविद्यालय में भी विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए।

यहां शिक्षाविद बाबूलाल शर्मा की पुस्तक ‘गीतों री फुलवारी’ का विमोचन किया गया। इसके साथ ही सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित हुए, जिनमें कलाकारों और विद्यार्थियों ने लोक संस्कृति के विभिन्न रंग प्रस्तुत किए।

नगर भ्रमण के दौरान लोगों से किया संवाद

योगेंद्र सैनी ने बताया कि यात्रा के तहत सुबह नगर भ्रमण का आयोजन भी किया गया। इस दौरान यात्रा से जुड़े लोगों ने शहरवासियों से संवाद कर लोकमंथन यात्रा के उद्देश्यों और गतिविधियों की जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि लोकमंथन लोक दर्शन यात्रा का उद्देश्य लोक जीवन, लोक संस्कृति, परंपराओं और सामाजिक सरोकारों को आमजन तक पहुंचाना है।

यात्रा के दौरान विभिन्न गांवों में स्थानीय लोगों की सहभागिता से कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इनके माध्यम से लोक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को सामने लाने के साथ सामाजिक जागरूकता के विषयों पर भी संवाद किया जा रहा है।

लोक संस्कृति के रंग में रंगा नजर आया खांदवा

खांदवा गांव में ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी और उत्साह ने यात्रा के कार्यक्रम को खास बना दिया। लोक प्रस्तुतियों, पारंपरिक गतिविधियों और संवाद के माध्यम से गांव में लोक संस्कृति की जीवंत तस्वीर देखने को मिली।

लोक संस्कृति के संरक्षण के साथ जल संरक्षण, पर्यावरण और स्वच्छता जैसे सामाजिक सरोकारों का संदेश भी कार्यक्रम के माध्यम से ग्रामीणों तक पहुंचाया गया।

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