झुंझुनूं, साम्राज्यवाद विरोधी दिवस के अवसर पर रविवार को बाकरा रोड रेलवे फाटक के आगे नवनिर्मित किसान मजदूर भवन का उद्घाटन किया गया। अखिल भारतीय किसान महासभा की ओर से आयोजित कार्यक्रम में किसान, मजदूर और विभिन्न जनसंगठनों से जुड़े कार्यकर्ताओं ने भाग लिया।
भवन का उद्घाटन प्रसिद्ध गणितज्ञ प्रो. डॉ. घासीराम ने किया। इसके बाद किसान-मजदूर सभा आयोजित हुई, जिसकी अध्यक्षता भी प्रो. डॉ. घासीराम ने की।
दीपांकर भट्टाचार्य ने सरकार की नीतियों पर साधा निशाना
सभा के मुख्य अतिथि भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) लिबरेशन के राष्ट्रीय महासचिव कॉमरेड दीपांकर भट्टाचार्य ने केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए।
उन्होंने कहा कि 9 अगस्त को अंग्रेजों भारत छोड़ो आंदोलन की स्मृति के साथ साम्राज्यवाद विरोधी दिवस और आदिवासी दिवस के रूप में भी देखा जाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार की नीतियों से किसान, मजदूर, आदिवासी और अल्पसंख्यक प्रभावित हुए हैं।
भट्टाचार्य ने कहा कि किसान, मजदूर, आदिवासी, युवा और छोटे दुकानदारों के संघर्षों को एकजुट करते हुए समता आधारित नए भारत के निर्माण के लिए प्रयास करने की जरूरत है।
उन्होंने किसान आंदोलनों और युवाओं के आंदोलनों का उल्लेख करते हुए वामपंथी ताकतों की एकता पर भी जोर दिया।
किसान-मजदूर भवन को संघर्षों का केंद्र बनाने पर जोर
सभा में विशिष्ट अतिथि कॉमरेड राजाराम सिंह, सांसद एवं अखिल भारतीय किसान महासभा के राष्ट्रीय महासचिव, कॉमरेड अमराराम, सांसद एवं सीपीआई (एम) पोलित ब्यूरो सदस्य तथा कॉमरेड प्रभात कुमार चौधरी, सीपीआई (एमएल) पोलित ब्यूरो सदस्य एवं राजस्थान प्रभारी सहित कई नेताओं ने संबोधित किया।
वक्ताओं ने कहा कि किसान मजदूर भवन का निर्माण किसान-मजदूरों के संघर्षों को मजबूत करने तथा उनके सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक अधिकारों के लिए संगठित प्रयासों को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
सभा में किसानों और मजदूरों के सामने मौजूद आर्थिक दबाव, कृषि संकट और बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई।
लाभकारी मूल्य और मजदूर अधिकारों की मांग
सभा में वक्ताओं ने किसानों की उपज का लाभकारी मूल्य सुनिश्चित करने, कृषि संकट का समाधान करने और मजदूरों के अधिकारों की रक्षा करने की मांग उठाई।
उन्होंने किसान-मजदूर विरोधी नीतियों के खिलाफ व्यापक जनसंघर्ष को तेज करने का आह्वान किया। साम्राज्यवाद विरोधी दिवस के संदर्भ में वक्ताओं ने आर्थिक और राजनीतिक वर्चस्व के आम लोगों पर पड़ने वाले प्रभावों पर भी अपने विचार रखे।
कई वामपंथी नेता रहे मौजूद
कार्यक्रम में केंद्रीय कमेटी सदस्य कामरेड फूलचंद ढेवा, पोलित ब्यूरो सदस्य कामरेड संजय शर्मा, राजस्थान राज्य सचिव कामरेड शंकर लाल चौधरी, सीपीआई (एम) के पूर्व विधायक कामरेड पेमाराम, पार्टी के राज्य सचिव कामरेड किशन पारीक, राज्य सीपीआई (एम) सचिवालय सदस्य कामरेड फूलचंद बर्वर सहित कई नेता मौजूद रहे।
इसके अलावा कामरेड विद्याधर गिल, सीपीआई के कामरेड बिड़दूराम सैनी, कामरेड ओमप्रकाश झारोड़ा, कामरेड रमेश चौधरी, गंगानगर के कामरेड रतन लाल पारीक सहित विभिन्न क्षेत्रों से आए कार्यकर्ताओं ने कार्यक्रम में भाग लिया।
किसान-मजदूर एकता मजबूत करने का संकल्प
कार्यक्रम के अंत में अखिल भारतीय किसान महासभा के राष्ट्रीय सचिव एवं भाकपा माले के जिला सचिव कामरेड रामचंद्र कुलहरि ने किसान-मजदूरों, जनसंगठनों और अतिथियों का आभार जताया।
उन्होंने किसान-मजदूर एकता को मजबूत करते हुए संघर्षों को आगे बढ़ाने का संकल्प दोहराया। साथ ही उन्होंने अगले दिन प्रस्तावित संयुक्त किसान मोर्चा के जेल भरो आंदोलन में झुंझुनूं में भाग लेने का आह्वान किया।






