झुंझुनूं। जिले में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए चिकित्सा विभाग ने पीएचसी स्तर पर निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। सूचना सभागार में हुई समीक्षा बैठक में गर्भवती महिलाओं के समय पर एएनसी पंजीकरण, नियमित जांच और हाई रिस्क प्रेग्नेंसी (HRP) की निगरानी में लापरवाही मिलने पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी गई।

सीएमएचओ डॉ. छोटेलाल गुर्जर ने चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों से मातृत्व सेवाओं को गंभीरता से लेने तथा फील्ड में नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित करने को कहा।

12 सप्ताह से पहले एएनसी पंजीकरण जरूरी

बैठक में आरसीएचओ डॉ. दयानंद सिंह ने निर्देश दिए कि प्रत्येक गर्भवती महिला का 12 सप्ताह से पहले एएनसी पंजीकरण सुनिश्चित किया जाए। गर्भावस्था के दौरान बीपी, हीमोग्लोबिन, ब्लड शुगर और आवश्यक रक्त जांच समय पर कराने पर विशेष जोर दिया गया।

प्रत्येक गर्भवती महिला के कम से कम 8 एएनसी चेकअप सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। अधिकारियों के अनुसार, समय पर जांच से गर्भावस्था की संभावित जटिलताओं की पहचान कर उपचार और जरूरत पड़ने पर रेफरल की व्यवस्था समय रहते की जा सकती है।

20 सप्ताह में सोनोग्राफी, HRP महिलाओं की विशेष निगरानी

स्वास्थ्य विभाग ने गर्भवती महिलाओं की करीब 20 सप्ताह में सोनोग्राफी कराने के निर्देश दिए। वहीं हाई रिस्क प्रेग्नेंसी वाली महिलाओं को विशेष निगरानी में रखने को कहा गया है।

बैठक में 30 से 40 सप्ताह की गर्भावस्था के दौरान HRP महिलाओं की नियमित जांच पर जोर दिया गया। इस अवधि में कम से कम तीन जांच कराने तथा किसी जोखिम या जटिलता के संकेत मिलने पर महिला को समय पर उच्च चिकित्सा संस्थान रेफर करने के निर्देश दिए गए।

स्वास्थ्यकर्मियों को HRP महिलाओं का नियमित फॉलोअप करने और सुरक्षित प्रसव की योजना सुनिश्चित करने को भी कहा गया।

मौसमी बीमारियों को लेकर विभाग अलर्ट

मौसम को देखते हुए बैठक में मौसमी बीमारियों की स्थिति की भी समीक्षा की गई। डिप्टी सीएमएचओ डॉ. भंवर लाल सर्वा ने अधिकारियों और स्वास्थ्यकर्मियों को क्षेत्र में सक्रिय रहकर बीमारी की रोकथाम और नियंत्रण के लिए प्रभावी कदम उठाने के निर्देश दिए।

विभाग के अनुसार, जरूरत के समय स्वास्थ्य सेवाओं में कमी न आए, इसके लिए सभी स्टाफ की छुट्टियां रद्द रखी जाएंगी। फील्ड स्टाफ को नियमित क्षेत्र भ्रमण कर मौसमी बीमारियों से जुड़े मामलों की निगरानी और आवश्यकता पड़ने पर तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने को कहा गया।

घर-घर सर्वे में कागजी खानापूर्ति नहीं

स्वास्थ्य विभाग ने घर-घर किए जाने वाले सर्वे की गुणवत्ता पर भी विशेष जोर दिया। टीमों को वास्तविक फील्ड सर्वे करने और केवल कागजी रिकॉर्ड पूरा करने से बचने के निर्देश दिए गए।

सर्वे में दर्ज जानकारी का क्रॉस चेक भी किया जाएगा। सीएमएचओ ने फील्ड कर्मचारियों को अपनी जिम्मेदारी गंभीरता से निभाने और सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक पहुंचाने को कहा।

परिवार कल्याण, एनक्यूएएस और टीबी कार्यक्रम की समीक्षा

बैठक में डॉ. अरुण अग्रवाल ने परिवार कल्याण और एनक्यूएएस कार्यक्रमों की प्रगति की समीक्षा की। संबंधित अधिकारियों को निर्धारित लक्ष्यों के अनुसार काम करने और स्वास्थ्य संस्थानों में गुणवत्तापूर्ण सेवाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।

वहीं डीटीओ डॉ. विजय मांजू ने टीबी उन्मूलन कार्यक्रम की समीक्षा की। उन्होंने संभावित टीबी मरीजों की समय पर पहचान, जांच, उपचार और फॉलोअप की प्रक्रिया को प्रभावी बनाने पर जोर दिया।

बैठक के अंत में सीएमएचओ डॉ. छोटेलाल गुर्जर ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं में गुणवत्ता, जवाबदेही और संवेदनशीलता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने खासतौर पर मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही को गंभीरता से लेने और नियमित फील्ड मॉनिटरिंग के निर्देश दिए।

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