बीमा कंपनियों को झटका: पॉलिसी की शर्तें नहीं बताईं तो भुगतने होंगे कानूनी परिणाम

बीमा पॉलिसी जारी करते समय उपभोक्ताओं को सभी नियम, शर्तें और अपवाद स्पष्ट रूप से बताना बीमा कंपनियों की कानूनी जिम्मेदारी है। झुंझुनूं जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने अपने महत्वपूर्ण आदेश में यह स्पष्ट किया है। आयोग के निर्देशों के बाद विभिन्न बीमा कंपनियों और एक ई-कॉमर्स कंपनी ने अवार्ड राशि जमा कराई, जिसके बाद 38 पीड़ित उपभोक्ताओं को राहत प्रदान की गई।

आयोग अध्यक्ष मनोज कुमार मील ने संबंधित उपभोक्ताओं को चेक वितरित करते हुए कहा कि उपभोक्ता अधिकारों की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी कंपनी को उपभोक्ताओं के साथ अनुचित व्यवहार करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।

पॉलिसी रद्द करने से पहले पूरी प्रक्रिया अपनाना जरूरी

आयोग अध्यक्ष मनोज कुमार मील और सदस्य प्रमेंद्र कुमार सैनी ने अपने निर्णय में कहा कि यदि कोई बीमा कंपनी किसी बीमा पॉलिसी को निरस्त करती है, तो उसे निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पूरी तरह पालन करना होगा।

आयोग ने स्पष्ट किया कि केवल पॉलिसी रद्द कर देना पर्याप्त नहीं है। कंपनी को यह भी साबित करना होगा कि उसने पॉलिसी निरस्तीकरण के कारणों और पूरी प्रक्रिया की जानकारी उपभोक्ता को विधिवत उपलब्ध कराई थी।

बीमा कंपनियों को सभी नियम और शर्तें बतानी होंगी

आयोग ने अपने आदेश में कहा कि बीमा पॉलिसी जारी करते समय कंपनियों का दायित्व है कि वे उपभोक्ताओं को पॉलिसी की सभी शर्तें, नियम, अपवाद, अधिकार और दायित्व स्पष्ट रूप से समझाएं।

यदि कोई कंपनी ऐसा नहीं करती है, तो उपभोक्ता विवाद की स्थिति में उसका प्रतिकूल प्रभाव उसी कंपनी को भुगतना पड़ सकता है। आयोग ने सर्वोच्च न्यायालय के एक महत्वपूर्ण फैसले का हवाला देते हुए कहा कि बीमा कंपनियां केवल व्यावसायिक लाभ और मुनाफे को प्राथमिकता नहीं दे सकतीं। उन्हें पारदर्शी, निष्पक्ष और विधिसम्मत तरीके से कार्य करना होगा।

38 उपभोक्ताओं को मिला मुआवजा, कंपनियों ने जमा कराई लाखों की राशि

आयोग के आदेश के बाद फ्यूचर जनरली इंडिया लाइफ इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड से जुड़े 33 उपभोक्ताओं को राहत मिली। इसके अलावा चोलामंडलम एमएस जनरल इंश्योरेंस कंपनी, आईसीआईसीआई, इफको टोक्यो इंश्योरेंस और फ्लिपकार्ट से संबंधित उपभोक्ताओं को भी आयोग के फैसले का लाभ मिला। फ्लिपकार्ट से जुड़े 2 और अन्य कंपनियों से जुड़े 1-1 उपभोक्ताओं को राहत प्रदान की गई।

आयोग के आदेश की पालना में चोलामंडलम एमएस जनरल इंश्योरेंस कंपनी ने 16.88 लाख रुपये, आईसीआईसीआई ने 81,454 रुपये, इफको टोक्यो ने 3.15 लाख रुपये और फ्लिपकार्ट ने 1.87 लाख रुपये आयोग में जमा कराए। इसके बाद संबंधित उपभोक्ताओं को चेक सौंपकर राशि वितरित की गई।

इस दौरान जिला जनसंपर्क अधिकारी हिमांशु सिंह, आयोग सदस्य प्रमेंद्र कुमार सैनी, रीडर महावीर मीणा, लेखा शाखा प्रभारी चंदन सैनी, मोहम्मद आदिल, अमित शर्मा, अधिवक्तागण और बड़ी संख्या में उपभोक्ता उपस्थित रहे।

आयोग अध्यक्ष ने उपभोक्ताओं से अपील की कि किसी भी बीमा पॉलिसी को खरीदने से पहले उसकी सभी शर्तों को अच्छी तरह समझें। यदि किसी प्रकार की अनुचित कार्रवाई होती है तो अपने अधिकारों की रक्षा के लिए उपभोक्ता आयोग का सहारा लेने में संकोच न करें।

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