झुंझुनूं नगर परिषद में अध्यक्ष पद अनारक्षित ओपन, चिड़ावा में ओबीसी ओपन; नई नगर पालिकाओं में भी तय हुआ आरक्षण
झुंझुनूं। आगामी नगर निकाय चुनाव से पहले अध्यक्ष पदों के आरक्षण की लॉटरी ने जिले के राजनीतिक समीकरण बदल दिए हैं। सबसे अधिक चर्चा झुंझुनूं नगर परिषद को लेकर है, जहां इस बार अध्यक्ष पद अनारक्षित ओपन श्रेणी में आया है। पिछली बार यह पद अनारक्षित महिला के लिए आरक्षित था।
आरक्षण की नई स्थिति के बाद अब कई निकायों में पुराने समीकरण बदल गए हैं और संभावित दावेदारों की सक्रियता बढ़ने की उम्मीद है।
प्रमुख निकायों में बदला आरक्षण
- चिड़ावा: अनारक्षित ओपन से बदलकर ओबीसी ओपन।
- खेतड़ी: अनारक्षित महिला से बदलकर ओबीसी महिला।
- मंडावा: ओबीसी ओपन से बदलकर अनारक्षित ओपन।
- पिलानी: एससी ओपन से बदलकर अनारक्षित ओपन।
- उदयपुरवाटी: ओबीसी ओपन से बदलकर अनारक्षित ओपन।
- बिसाऊ: अनारक्षित ओपन से बदलकर अनारक्षित महिला।
- नवलगढ़: अनारक्षित ओपन से बदलकर अनारक्षित महिला।
- सूरजगढ़: अनारक्षित महिला से बदलकर अनारक्षित ओपन।
नई नगर पालिकाओं में पहली बार तय हुआ आरक्षण
जिले में नई नगर पालिकाओं के गठन के बाद इन निकायों में पहली बार चुनाव होने जा रहे हैं। इनके अध्यक्ष पदों का आरक्षण भी तय हो गया है।
- बुहाना: एससी महिला
- डूंडलोद: ओबीसी ओपन
- जाखल: अनारक्षित ओपन
- मलसीसर: ओबीसी ओपन
- मंड्रेला: अनारक्षित महिला
- सिंघाना: अनारक्षित महिला
- सुल्ताना: अनारक्षित महिला
नई नगर पालिकाओं में आरक्षण तय होने के साथ स्थानीय स्तर पर पहली बार अध्यक्ष पद के लिए चुनावी दावेदारी और राजनीतिक सक्रियता बढ़ने की संभावना है।
बगड़ और मुकुंदगढ़ में नहीं बदली स्थिति
बगड़ और मुकुंदगढ़ में अध्यक्ष पद पिछली बार भी अनारक्षित ओपन था और इस बार भी दोनों निकायों में अध्यक्ष पद अनारक्षित ओपन ही रखा गया है।
आरक्षण की स्थिति स्पष्ट होने के बाद अब राजनीतिक दलों के सामने संभावित उम्मीदवारों के चयन और वार्डवार समीकरण साधने की चुनौती होगी। खासतौर पर झुंझुनूं नगर परिषद, मंडावा, पिलानी, उदयपुरवाटी और सूरजगढ़ जैसे निकायों में बदले आरक्षण के कारण चुनावी रणनीति में बदलाव देखने को मिल सकता है।






