झुंझुनूं के उपखंड मजिस्ट्रेट न्यायालय ने 61 वर्षीय वृद्ध महिला शकुंतला कस्वां को अंतरिम राहत देते हुए उनके स्वामित्व वाले मकान में दोबारा प्रवेश दिलाने के आदेश जारी किए हैं। न्यायालय ने प्रतिवादी को महिला के प्रवेश में किसी भी प्रकार की बाधा नहीं डालने के निर्देश दिए हैं।
मामले में न्यायालय ने माता-पिता एवं वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण एवं कल्याण अधिनियम, 2007 के प्रावधानों का उल्लेख करते हुए वरिष्ठ नागरिकों के अधिकारों की सुरक्षा पर जोर दिया।
पुत्र और पुत्रवधू पर लगाए बेदखली के आरोप
न्यायालय में प्रस्तुत परिवाद के अनुसार, शकुंतला कस्वां ने अपने पुत्र हेमंत कस्वां और पुत्रवधू पर आरोप लगाया कि उन्हें उनके ही स्वामित्व वाले मकान से बेदखल कर दिया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ा।
मामले की सुनवाई के दौरान न्यायालय ने प्रथम दृष्टया माना कि महिला अपने स्वामित्व वाले मकान में रहने की अधिकारिणी हैं।
न्यायालय ने जारी किए अंतरिम निर्देश
उपखंड अधिकारी एवं पीठासीन अधिकारी रामकरण (आरएएस) ने अंतरिम आदेश जारी करते हुए प्रतिवादी हेमंत कस्वां को निर्देश दिया कि वे इंदिरा नगर, रोड नंबर-1, झुंझुनूं स्थित मकान में वृद्ध महिला के प्रवेश में किसी प्रकार का व्यवधान उत्पन्न न करें।
उपखंड न्यायालय के रीडर सुनील ने आदेश पढ़कर सुनाया तथा प्रतिवादी को इसकी पालना के लिए पाबंद किया।
पुलिस को भी दिए गए निर्देश
न्यायालय ने कोतवाली थाना पुलिस को आदेश की पालना सुनिश्चित कराने तथा आवश्यकता पड़ने पर वृद्ध महिला को पुलिस सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।
न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि मामले में अंतिम सुनवाई और निर्णय होने तक यह अंतरिम आदेश प्रभावी रहेगा।






