झुंझुनूं में 14 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर स्काउट्स मैदान में जिला स्तरीय ‘विभाजन विभीषिका’ संगोष्ठी एवं युवाओं से संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में वर्ष 1947 के विभाजन की त्रासदी, विस्थापन और संघर्ष के साथ स्वतंत्रता संग्राम तथा वर्तमान पीढ़ी की राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारियों पर चर्चा हुई।
कार्यक्रम में नगरीय निकाय एवं स्वायत्त शासन विभाग के मंत्री झाबर सिंह खर्रा मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने कहा कि देश की आजादी करोड़ों लोगों के संघर्ष, त्याग, बलिदान और राष्ट्रभावना का परिणाम है।
नई पीढ़ी को इतिहास समझने की जरूरत
मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास को व्यापक नजरिए से समझना जरूरी है। विभिन्न विचारधाराओं, संगठनों, सामाजिक आंदोलनों और आमजन की भूमिका को समझने से ही नई पीढ़ी आजादी के वास्तविक महत्व को बेहतर तरीके से जान सकेगी।
उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को सही इतिहास और विभाजन के दौरान हुए संघर्ष की जानकारी होगी तो उसके मन में राष्ट्र के प्रति प्रेम, समर्पण और त्याग की भावना मजबूत होगी। इतिहास की पीड़ा को जानने का उद्देश्य केवल अतीत को याद करना नहीं, बल्कि उससे वर्तमान और भविष्य के लिए सीख लेना है।
खर्रा ने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम में राष्ट्रवाद, सामाजिक जागरण और सांस्कृतिक एकता की भावना की महत्वपूर्ण भूमिका रही। उन्होंने देश की एकता, अखंडता, सांस्कृतिक विरासत और राष्ट्रहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देने पर जोर दिया।
‘विभाजन की पीड़ा को मानवीय नजरिए से समझना जरूरी’
मंत्री ने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम और विभाजन की त्रासदी को केवल राजनीतिक नजरिए से नहीं, बल्कि मानवीय दृष्टिकोण से भी समझना चाहिए। विभाजन के दौरान लाखों लोगों को अपना घर छोड़ना पड़ा और असंख्य परिवारों ने अपनों को खोया।
उन्होंने कहा कि इस पीड़ा को याद करना आने वाली पीढ़ियों को शांति, एकता और भाईचारे का संदेश देने का माध्यम बनना चाहिए।
2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य पर जोर
खर्रा ने कहा कि देश के सामने 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का लक्ष्य है। उन्होंने युवाओं से स्वतंत्रता सेनानियों और विभाजन की पीड़ा झेलने वाले लोगों के संघर्ष से प्रेरणा लेकर देश की प्रगति में योगदान देने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि आजादी का वास्तविक सम्मान तभी होगा, जब हर नागरिक देश की एकता, अखंडता, सामाजिक समरसता और विकास में अपनी भूमिका निभाए।
‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ का उद्देश्य बताया
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता एवं विचारक बजरंगलाल ने कहा कि विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस केवल इतिहास के एक अध्याय को याद करने का अवसर नहीं है, बल्कि उन लाखों लोगों के दर्द, संघर्ष और त्याग को नमन करने का अवसर है, जिन्होंने 1947 में विभाजन की त्रासदी झेली।
उन्होंने कहा कि विभाजन के दौरान हुए विस्थापन और पीड़ा की जानकारी आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना जरूरी है, ताकि समाज इतिहास से सीख लेकर भविष्य में ऐसी परिस्थितियों से बचने के लिए सजग रहे।
कलेक्टर बोले- इतिहास से सबक लेकर आगे बढ़ें
जिला कलेक्टर डॉ. अरुण गर्ग ने कहा कि विभाजन का इतिहास समाज को बहुत कुछ सिखाता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसी ऐतिहासिक त्रासदियों को याद करने का उद्देश्य किसी के प्रति वैमनस्य पैदा करना नहीं, बल्कि उनसे सीख लेकर बेहतर और शांतिपूर्ण भविष्य का निर्माण करना होना चाहिए।
उन्होंने युवाओं और आमजन से मानवता को सर्वोपरि रखते हुए आपसी भाईचारे, सद्भाव और सामाजिक समरसता को मजबूत करने की अपील की। उन्होंने कहा कि भारत की विविधता उसकी ताकत है और देश की एकता व अखंडता को मजबूत रखना प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है।
वक्ताओं ने कहा- आजादी का गौरव और विभाजन का दर्द दोनों याद रखें
झुंझुनूं विधायक राजेंद्र भांबू, उदयपुरवाटी के पूर्व विधायक शुभकरण चौधरी, पूर्व सांसद संतोष अहलावत और निवर्तमान जिला प्रमुख ने भी संगोष्ठी को संबोधित किया।
वक्ताओं ने कहा कि भारत की आजादी हर देशवासी के लिए गौरव का विषय है, लेकिन इसके साथ विभाजन का ऐसा दर्द भी जुड़ा है जिसे भुलाया नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि विभाजन के दौरान लोगों को घर, जमीन-जायदाद और अपनी जड़ों तक को छोड़ना पड़ा।






