झुंझुनूं। अखिल भारतीय किसान महासभा का पांचवां राष्ट्रीय सम्मेलन 20 और 21 सितंबर को पंजाब के जालंधर में आयोजित हुआ। सम्मेलन में देश में कृषि संकट, किसानों की समस्याओं और किसान संगठनों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई।
झुंझुनूं जिला अध्यक्ष कामरेड ओमप्रकाश झारोड़ा और राज्य उपाध्यक्ष कामरेड चंद्रदेव ओला ने सम्मेलन में शेखावाटी में सिंचाई के लिए यमुना नहर का पानी जल्द लाने का मुद्दा उठाया।
उन्होंने वर्ष 1994 में पांच राज्यों के बीच हुए यमुना जल बंटवारे के समझौते का हवाला देते हुए शेखावाटी के लिए सिंचाई पानी उपलब्ध कराने का सवाल सम्मेलन में रखा।
किसानों-मजदूरों की कर्जमुक्ति का मुद्दा भी उठा
सम्मेलन में किसानों और मजदूरों की कर्जमुक्ति का मुद्दा भी उठाया गया। बैंकों और फाइनेंस कंपनियों के कर्जदारों को कथित तौर पर डराने-धमकाने तथा उनकी संपत्ति नीलाम करने से रोकने की मांग से जुड़ा विषय भी रखा गया।
किसान महासभा के राष्ट्रीय सम्मेलन से पहले भी विभिन्न राज्यों से आए प्रतिनिधियों ने कृषि संकट, किसानों की कर्जदारी, एमएसपी और खेती से जुड़े मुद्दों पर सम्मेलन में चर्चा की बात कही थी।
1125 प्रतिनिधियों के पहुंचने का दावा
झुंझुनूं से मिली जानकारी के अनुसार सम्मेलन में 21 राज्यों से 1125 प्रतिनिधि पहुंचे। दो दिवसीय सम्मेलन में मौजूदा कृषि संकट पर चर्चा की गई।
सम्मेलन में संगठन की 57 सदस्यीय राष्ट्रीय कार्यकारिणी और 153 सदस्यीय राष्ट्रीय परिषद का चयन किया गया।
रामचंद्र कुलहरि फिर राष्ट्रीय कार्यकारिणी में
झुंझुनूं जिले से कामरेड रामचंद्र कुलहरि को एक बार फिर राष्ट्रीय कार्यकारिणी में चुना गया। वहीं कामरेड फूलचंद ढेवा को मानद सदस्य के रूप में चुने जाने की जानकारी दी गई।
राष्ट्रीय परिषद में रामचंद्र कुलहरि और फूलचंद ढेवा के अलावा कामरेड इंद्राज सिंह चारावास, कामरेड रामोतार शर्मा और कामरेड विद्याधर गर्सा का चयन बताया गया है।
सतनाम सिंह अजनाला अध्यक्ष, पुरुषोत्तम शर्मा महासचिव
सम्मेलन में डॉक्टर सतनाम सिंह अजनाला को राष्ट्रीय अध्यक्ष और कामरेड पुरुषोत्तम शर्मा को राष्ट्रीय महासचिव चुने जाने की जानकारी दी गई है।
अन्य पदाधिकारियों का चयन राष्ट्रीय कार्यकारिणी की अगली बैठक में किया जाएगा।
शेखावाटी के सिंचाई मुद्दे पर नजर
राष्ट्रीय सम्मेलन में उठाए गए मुद्दों में शेखावाटी में यमुना नहर का पानी लाने का सवाल झुंझुनूं और आसपास के किसानों के लिए महत्वपूर्ण स्थानीय विषय के रूप में सामने आया। अब इस मुद्दे को लेकर किसान संगठन आगे किस तरह की गतिविधियां करते हैं, इस पर नजर रहेगी।






