बरखंडी बाबा के दर्शन कर लौटते समय नवलगढ़ के श्रद्धालु को आया हार्ट अटैक, 2024 की बजट घोषणा के बाद भी अटका रोपवे प्रोजेक्ट
उदयपुरवाटी । मिनी हरिद्वार के नाम से प्रसिद्ध लोहार्गल धाम की बरखंडी पहाड़ी पर बुधवार को एक श्रद्धालु की तबीयत बिगड़ने के बाद मौत हो गई। नवलगढ़ की पुजारी की ढाणी निवासी 45 वर्षीय सुरेश जांगिड़ बरखंडी बाबा के दर्शन के बाद आगे जा रहे थे, इसी दौरान अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई। दोस्तों के अनुसार उन्हें हार्ट अटैक आया और वे बेहोश होकर गिर पड़े।
पहाड़ी क्षेत्र में तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध नहीं होने के कारण दोस्तों को सुरेश के शव को करीब 3000 फीट की ऊंचाई वाले दुर्गम और फिसलन भरे रास्ते से कंधों पर उठाकर नीचे लाना पड़ा। दोस्तों ने करीब एक घंटे की मशक्कत के बाद शव को नीचे पहुंचाया।
दर्शन के बाद केदार बाबा की ओर जा रहे थे
दोस्तों के अनुसार सुरेश जांगिड़ बुधवार सुबह करीब 11 बजे अपने साथियों के साथ बरखंडी बाबा के दर्शन के लिए पहुंचे थे। दर्शन करने के बाद वे केदार बाबा के दर्शन के लिए आगे बढ़ रहे थे। दोस्तों का कहना है कि करीब 1051 मीटर की ऊंचाई से लगभग 250 मीटर नीचे उतरने के दौरान सुरेश की तबीयत अचानक खराब हो गई।
दोस्तों के अनुसार उन्हें सांस लेने में परेशानी हुई और वे बेहोश होकर गिर पड़े। मौके पर तत्काल प्राथमिक चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध नहीं हो सकी। इसके बाद साथियों ने उन्हें नीचे लाने का प्रयास किया, लेकिन उनकी जान नहीं बच सकी।
करीब एक घंटे तक शव लेकर उतरे दोस्त
सुरेश के दोस्तों ने बताया कि पहाड़ी का रास्ता बेहद कठिन और फिसलन भरा था। शव को कंधे पर लेकर नीचे उतरने में करीब एक घंटे का समय लगा। दोस्तों का कहना है कि यदि पहाड़ी पर तत्काल मेडिकल सहायता या रोपवे जैसी सुविधा उपलब्ध होती तो आपात स्थिति में मदद मिलने में आसानी हो सकती थी।
घर में मंदिर के पुजारी भी थे सुरेश
सुरेश जांगिड़ फर्नीचर का काम करते थे। इसके साथ ही वे अपने घर में बने जोतराम बाबा मंदिर में पुजारी भी थे। मंदिर में दूर-दूर से श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं।
सुरेश अपने पीछे 20 वर्षीय बेटे और 15 वर्षीय बेटी को छोड़ गए हैं। घटना की जानकारी के बाद परिवार और गांव में शोक का माहौल है।
2024 की बजट घोषणा के बाद भी रोपवे का इंतजार
बरखंडी बाबा मंदिर तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को करीब तीन घंटे की कठिन चढ़ाई करनी पड़ती है। श्रद्धालुओं की सुविधा को देखते हुए राज्य सरकार की ओर से वर्ष 2024 के बजट में बरखंडी पहाड़ी पर रोपवे निर्माण की घोषणा की गई थी।
दिसंबर 2025 में रोपवे निर्माण को लेकर विभागीय सर्वे भी पूरा किए जाने की जानकारी सामने आई थी। पर्यटन विभाग के अधिकारियों के अनुसार परियोजना को पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल पर प्रस्तावित किया गया था।
हालांकि, अब तक निवेशक आगे नहीं आने के कारण रोपवे निर्माण शुरू नहीं हो सका है। ऐसे में बुधवार को हुई घटना के बाद एक बार फिर बरखंडी पहाड़ी पर चिकित्सा और आवागमन सुविधाओं की जरूरत को लेकर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं की मांग है कि रोपवे परियोजना को जल्द आगे बढ़ाने के साथ पहाड़ी पर आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाए।






