उदयपुरवाटी। झुंझुनूं के खोह गांव की पहाड़ियों में स्थित प्राचीन मनसा माता मंदिर में पूजा-अर्चना के पारंपरिक अधिकार को लेकर विवाद सामने आया है। मामले को लेकर राजस्थान नाथ समाज की प्रदेशाध्यक्ष शंभू दयाल योगी की अध्यक्षता में बैठक हुई, जिसमें समाज के प्रतिनिधियों ने अपने पारंपरिक अधिकार को लेकर आपत्ति जताई और प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग की।
बैठक में समाज की ओर से आरोप लगाया गया कि मंदिर में वर्षों से चले आ रहे पूजा-अर्चना के अधिकार में बदलाव किया जा रहा है। नाथ समाज ने इस मामले में निष्पक्ष जांच और समाधान की मांग की है।
अंग्रेजों के समय से अधिकार होने का दावा
बैठक में वक्ताओं ने दावा किया कि ब्रिटिश शासनकाल से मनसा माता मंदिर की सेवा और पूजा-अर्चना का अधिकार नाथ समाज के पास रहा है। समाज का आरोप है कि अब इस पारंपरिक व्यवस्था को बदलकर अन्य जाति को पूजा का अधिकार दिए जाने का प्रयास किया जा रहा है।
नाथ समाज ने इसे अपने ऐतिहासिक और धार्मिक अधिकारों से जुड़ा मामला बताते हुए प्रशासन से पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
न्याय नहीं मिला तो आंदोलन की चेतावनी
प्रदेशाध्यक्ष शंभू दयाल योगी ने जिला और पुलिस प्रशासन से मामले में तत्काल हस्तक्षेप कर नाथ समाज की शिकायत का निष्पक्ष समाधान कराने की अपील की।
उन्होंने कहा कि यदि समय रहते समाज को न्याय नहीं मिला तो नाथ समाज बड़े स्तर पर आंदोलन करेगा। साथ ही उन्होंने बताया कि समाज के वरिष्ठ सदस्यों से चर्चा के बाद एक विशाल सार्वजनिक महापंचायत आयोजित करने की तिथि घोषित की जाएगी।
बैठक में बड़ी संख्या में लोग हुए शामिल
बैठक में भंवरलाल जोगी, राजू जोगी, जगदीश जोगी, नांचू राम जोगी, शंकर योगी, विनोद योगी, संतु राम जोगी, नरेश योगी, बलराम जोगी, सुरेश योगी, धर्मेंद्र जोगी, पिंटू जोगी, मूलचंद जोगी, रोहतास जोगी, ग्यारसी लाल योगी, फतेह सिंह और चांद योगी सहित बड़ी संख्या में समाज के लोग मौजूद रहे।
प्रदेशाध्यक्ष ने क्या कहा?
राजस्थान नाथ समाज के प्रदेशाध्यक्ष शंभू दयाल योगी ने कहा कि समाज अपने सदस्यों के साथ खड़ा है। उन्होंने कहा कि समाज मंदिर से जुड़े अपने पारंपरिक धार्मिक अधिकार को वापस दिलाने के लिए हर स्तर पर संघर्ष करेगा।
उन्होंने कहा कि वरिष्ठ समाज बंधुओं से विचार-विमर्श के बाद आगामी महापंचायत की तिथि घोषित की जाएगी।
नोट: मंदिर के पूजा-अधिकार से जुड़े दावों और आरोपों की स्वतंत्र प्रशासनिक या न्यायिक पुष्टि की जानकारी उपलब्ध नहीं है। यह खबर बैठक में नाथ समाज की ओर से रखे गए पक्ष और मांगों पर आधारित है।






