उदयपुरवाटी (झुंझुनूं)। आस्था और संकल्प की एक ऐसी कहानी इन दिनों चर्चा में है, जिसमें एक पिता अपने परिवार और करीब 11 क्विंटल वजन के साथ लंबी पदयात्रा पर निकला है।
उत्तर प्रदेश के पुराना गोकुल, मथुरा निवासी नरेश जांगिड़ पांचाल अपनी बेटी के कैंसर से ठीक होने के बाद भगवान का आभार व्यक्त करने के लिए संपूर्ण भारत की दूसरी विशाल पदयात्रा पर निकले हैं।
कड़ाके की धूप, सर्दी, बारिश और पथरीले रास्तों के बीच नरेश लगातार अपनी करीब 9 क्विंटल वजनी रेहड़ी को खींचकर आगे बढ़ रहे हैं। रेहड़ी में परिवार के सदस्यों और गृहस्थी के सामान को मिलाकर कुल वजन करीब 11 क्विंटल बताया गया है।
छह बच्चे भी इसी रेहड़ी में कर रहे यात्रा
इस यात्रा की खास बात यह है कि नरेश के साथ उनके परिवार के छह बच्चे भी इसी रेहड़ी में सफर कर रहे हैं।
रेहड़ी में बेटा दीपक, बेटी ज्योति, दोहिता विशाल (4 वर्ष), विष्णु (2 वर्ष), दोहिती परी (ढाई वर्ष) और महज 4 महीने की गुड़िया भी सवार हैं।
रेहड़ी में 24 घंटे जलती है अखंड ज्योति
नरेश की रेहड़ी सिर्फ यात्रा का साधन नहीं है। इसमें 9 देवियों सहित राधा-कृष्ण, बाबा श्याम, सालासर दरबार और भैरुं जी की अखंड ज्योति लगातार प्रज्वलित रहती है।
नरेश का कहना है कि पूरी यात्रा के दौरान वे किसी से भी एक रुपये का चंदा या आर्थिक मदद नहीं लेते।
रेहड़ी में ही रसोई, खुद बनाते हैं भोजन
यात्रा के दौरान परिवार की रसोई भी रेहड़ी में ही है। इसमें राशन, बर्तन और खाना बनाने का सामान रखा गया है।
नरेश के अनुसार वे किसी अन्य स्थान या व्यक्ति का बनाया हुआ भोजन और पानी तक ग्रहण नहीं करते। इसी वजह से रेहड़ी ही परिवार के लिए घर, रसोई और यात्रा का केंद्र बनी हुई है।
बेटी के कैंसर से ठीक होने के बाद लिया संकल्प
नरेश जांगिड़ बताते हैं कि इस कठिन साधना के पीछे उनकी बेटी ज्योति की बीमारी से जुड़ी भावनात्मक वजह है। ज्योति को कैंसर था।
पहली पदयात्रा के दौरान नरेश ने भगवान से अपनी बेटी के जीवन और स्वास्थ्य के लिए मन्नत मांगी थी। उनके अनुसार, इसके बाद उनकी बेटी पूरी तरह कैंसर मुक्त हो गई।
बेटी के स्वस्थ होने के बाद भगवान के प्रति आभार व्यक्त करने और मन्नत पूरी करने के भाव से उन्होंने दूसरी पदयात्रा शुरू की।
10 मई 2026 से शुरू हुई 14 महीने की यात्रा
नरेश की यह पदयात्रा 10 मई 2026 को शुरू हुई है। उन्होंने इसे लगातार 14 महीने तक जारी रखने का संकल्प लिया है और यात्रा 10 जुलाई 2027 को पूरी करने का लक्ष्य रखा है।
84 कोस परिक्रमा से शुरू हुआ सफर
नरेश ने अपनी यात्रा की शुरुआत मथुरा की प्रसिद्ध 84 कोस परिक्रमा पूरी करने के बाद की। इसके बाद यात्रा सालासर बालाजी, खाटू श्याम जी, लोहार्गल की बाबा मालकेतु 24 कोसी परिक्रमा और मां शाकंभरी देवी के पावन धाम से होते हुए गुड़गांव माता शीतला के दर्शन करते हुए मां वैष्णो देवी के दरबार की ओर बढ़ रही है।
यात्रा के दौरान रास्ते में आने वाले प्रमुख मंदिरों में नरेश अपने परिवार के साथ दर्शन कर रहे हैं।
अब तीसरी भारत पदयात्रा का भी संकल्प
नरेश जांगिड़ कहते हैं कि पहली यात्रा के दौरान रास्तों और चढ़ाइयों का अनुभव कम होने के कारण कुछ परेशानियां आई थीं। अब उन्हें यात्रा का अनुभव है और भगवान के भरोसे कठिन रास्ते भी आसान लगते हैं।
उन्होंने कहा, “यदि प्रभु की कृपा ऐसी ही बनी रही, तो इस यात्रा के संपन्न होते ही मैं तीसरी भारत पदयात्रा भी आरंभ करूंगा।”
नरेश की यह यात्रा पिता के अपनी संतान के प्रति प्रेम, आस्था और संकल्प की कहानी के रूप में लोगों का ध्यान खींच रही है। 11 क्विंटल वजन वाली रेहड़ी में परिवार के साथ लगातार आगे बढ़ता यह परिवार रास्ते में मिलने वाले लोगों के लिए भी कौतूहल का विषय बना हुआ है।






