राजस्थान हाईकोर्ट ने झुंझुनूं शहर की अन्नपूर्णा रसोई संख्या-1520 का संचालन करने वाली संस्था के खिलाफ की गई प्रशासनिक कार्रवाई पर अंतरिम राहत प्रदान की है। न्यायालय ने संस्था को ब्लैकलिस्ट करने, अनुबंध निरस्त करने तथा एक लाख रुपये की पेनल्टी लगाने के आदेश पर रोक लगाते हुए संबंधित अधिकारियों से चार सप्ताह में जवाब मांगा है।

यह आदेश न्यायमूर्ति शुभा मेहता की अदालत ने सुनवाई के बाद जारी किया।

10 जून के आदेश को दी थी चुनौती

मामले के अनुसार, शहरी आजीविका केंद्र संस्थान, झुंझुनूं के सचिव विमल यादव ने स्वायत्त शासन विभाग के 10 जून 2026 के आदेश को राजस्थान हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।

याचिका में कहा गया कि जांच के आधार पर संस्था का अनुबंध निरस्त कर उसे ब्लैकलिस्ट किया गया तथा एक लाख रुपये की पेनल्टी लगाई गई, जबकि यह निर्णय मनमाना और विधि सम्मत प्रक्रिया का पालन किए बिना लिया गया।

‘पक्ष सुने बिना की गई कार्रवाई’ का आरोप

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता संजय महला और सुनीता महला ने न्यायालय को बताया कि संस्था द्वारा किसी प्रकार की अनियमितता नहीं की गई और न ही कोई शिकायत दर्ज थी। उनका कहना था कि कार्रवाई से पहले संस्था को अपना पक्ष रखने का अवसर भी नहीं दिया गया।

याचिका में न्यायालय से विवादित आदेश पर रोक लगाने तथा अन्नपूर्णा रसोई का संचालन यथावत जारी रखने के निर्देश देने की मांग की गई थी।

हाईकोर्ट ने जारी किए नोटिस

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद राजस्थान हाईकोर्ट ने फिलहाल विभाग के 10 जून 2026 के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी। साथ ही निदेशक, स्वायत्त शासन विभाग (डीएलबी), जयपुर, जिला कलेक्टर, झुंझुनूं तथा नगर परिषद आयुक्त को नोटिस जारी कर चार सप्ताह के भीतर जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

अब मामले की अगली सुनवाई संबंधित विभागों के जवाब के बाद होगी।

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