जयंती विशेष | 2 फरवरी लेखक – धर्मपाल गाँधी, अध्यक्ष आदर्श समाज समिति इंडिया
देश की आज़ादी और नवनिर्माण के लिए अपना सम्पूर्ण जीवन समर्पित करने वाली राजकुमारी अमृत कौर एक महान स्वतंत्रता सेनानी, प्रख्यात गांधीवादी नेता और सामाजिक सुधारक थीं। वे स्वतंत्र भारत की पहली स्वास्थ्य मंत्री और पहली महिला कैबिनेट मंत्री थीं।
राजसी ठाठ से तपस्वी जीवन तक
राजकुमारी अमृत कौर का जन्म 2 फरवरी 1889 को हुआ था। वे कपूरथला के शाही परिवार से थीं, लेकिन महात्मा गांधी के विचारों से प्रभावित होकर उन्होंने राजसी जीवन त्याग दिया।
उन्होंने विवाह नहीं किया और जीवनभर राष्ट्रसेवा को ही अपना ध्येय बनाया।
स्वतंत्रता आंदोलन में अग्रणी भूमिका
राजकुमारी अमृत कौर ने
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दांडी मार्च (1930) में भाग लिया
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भारत छोड़ो आंदोलन में जेल यात्रा की
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16 वर्षों तक महात्मा गांधी की सचिव रहीं
उनका जीवन स्वतंत्रता संग्राम के समर्पण और साहस की मिसाल है।
संविधान सभा से संसद तक
वे संविधान सभा की सदस्य रहीं और
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महिलाओं के अधिकार
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सार्वभौमिक मताधिकार
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सामाजिक समानता
जैसे मुद्दों पर मुखर आवाज़ उठाई।
1947 में वे पहले नेहरू मंत्रिमंडल की एकमात्र महिला मंत्री थीं।
AIIMS और स्वास्थ्य क्रांति की नींव
1947 से 1957 तक लगातार 10 वर्षों तक केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री रहते हुए उन्होंने
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अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) की स्थापना करवाई
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भारत की सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली को मज़बूत आधार दिया
उनकी पहल पर भारत को वैश्विक स्वास्थ्य पहचान मिली।
WHO की पहली महिला अध्यक्ष
1950 में राजकुमारी अमृत कौर को
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) का अध्यक्ष बनाया गया।
वे यह पद पाने वाली पहली महिला और पहली एशियाई थीं।
महिला सशक्तिकरण की प्रतीक
उन्होंने
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बाल विवाह और पर्दा प्रथा का विरोध किया
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महिला शिक्षा को अनिवार्य बनाने की वकालत की
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1927 में अखिल भारतीय महिला सम्मेलन की स्थापना की
उनका मानना था
“शिक्षा ही महिलाओं की वास्तविक मुक्ति का मार्ग है।”
विरासत जो आज भी जीवित है
2 अक्टूबर 1964 को उनका निधन हुआ, लेकिन
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AIIMS
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महिला अधिकार आंदोलन
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सार्वजनिक स्वास्थ्य ढांचा
आज भी उनकी दूरदृष्टि की गवाही देते हैं।
नमन
राजकुमारी अमृत कौर केवल एक नेता नहीं, बल्कि
त्याग, सेवा और साहस की जीवंत प्रतिमूर्ति थीं।
उनका जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणास्रोत रहेगा।
