Hindi News / Jhunjhunu News (झुंझुनू समाचार) / राजस्थान का वो शहर, जो ‘जयपुर II’ बनने से चूक गया

,

राजस्थान का वो शहर, जो ‘जयपुर II’ बनने से चूक गया

Jhunjhunu News (झुंझुनू समाचार) : राजस्थान का वो शहर, जो 'जयपुर II' बनने से चूक गया

ठाकुर नवल सिंह, जिन्होंने अपने नाम पर ‘नवलगढ़’ जैसा खूबसूरत शहर तो बसाया ही था, लेकिन माखर के लिए उनका प्लान उससे भी बड़ा था। वे चाहते थे कि माखर केवल एक गांव न रहे, बल्कि एक ऐसा व्यापारिक केंद्र बने जैसा राजा सवाई जय सिंह ने जयपुर को बनाया था।

नवल सिंह ने माखर में जो सबसे बड़ा काम किया, वह था ‘नियोजित समाज’ (Social Planning)। उन्होंने एक पूरा इको-सिस्टम तैयार किया:

  • किसानों और बागवानों (माली समाज) को एक तरफ बसाया ताकि शहर को ताजी सब्जियां मिलें।

  • लोहे और औजार बनाने वालों (लोहार) को जगह दी ताकि निर्माण कार्य न रुके।

  • चमड़े और बुनियादी कारीगरी (चमार समाज) के लिए अलग इलाका बनाया।

  • व्यापारियों (बनिया/महाजन) को मुख्य बाजार और चौराहों पर बसाया।

माखरिया और पीरामल: नाम बदलने की पहेली

यहाँ बहुत से लोग कन्फ्यूज हो जाते हैं कि ये माखरिया और पीरामल कौन हैं? इसे ऐसे समझिए: माखर गांव के रहने वाले जो बड़े व्यापारी थे, वे बाहर जाकर ‘मखारिया’ कहलाए। उन्हीं व्यापारियों में एक बहुत बड़े नामी सेठ हुए – पीरामल चतुर्भुज। उनके बाद उनके बेटों-पोतों ने अपने परदादा ‘पीरामल’ के नाम को ही अपना सरनेम बना लिया।

Read More Piramal Empire का रहस्य
 

‘जयपुर II’ अधूरा क्यों रह गया? (पतन की कहानी)

सब कुछ सही चल रहा था, लेकिन फिर वक्त बदला। इसके पीछे तीन मुख्य कारण थे:

  1. नेतृत्व की कमी: ठाकुर नवल सिंह की मृत्यु के बाद, उनके जैसा दूरदर्शी शासक दोबारा नहीं मिला। योजनाएं फाइलों (या उस समय के बही-खातों) में ही रह गईं।

  2. व्यापारिक पलायन: माखरिया और पीरामल परिवारों ने देखा कि असली व्यापार तो बॉम्बे (मुंबई) के बंदरगाहों पर है। धीरे-धीरे सारा पैसा और ध्यान माखर से हटकर मुंबई चला गया।

  3. पानी का संकट: राजस्थान में पानी की कमी हमेशा से रही है। बिना किसी बड़ी नदी या नहर के, इतने बड़े शहर को जिंदा रखना नामुमकिन था।

नतीजा यह हुआ कि माखर की चौड़ी सड़कें और चौकड़ियाँ तो बन गईं, लेकिन वहाँ वो रौनक नहीं आ पाई जो जयपुर में थी।

वर्तमान माखर: ग्रेनाइट का साम्राज्य

भले ही शहर नहीं बसा, लेकिन माखर की जमीन ने धोखा नहीं दिया। आज माखर पूरे भारत में अपने ग्रेनाइट (कीमती पत्थर) के लिए जाना जाता है। यहाँ की पहाड़ियों से निकलने वाला पत्थर आज बड़े-बड़े बंगलों और सरकारी इमारतों की शान बढ़ा रहा है। जो विजन कभी मखारिया परिवार ने देखा था, वह आज औद्योगिक रूप में जीवित है।

विष्य का बदलाव: रतन शहर पंचायत का विभाजन

प्रशासनिक दृष्टिकोण से माखर एक बड़े बदलाव की दहलीज पर खड़ा है। वर्तमान में माखर और आसपास का क्षेत्र एक बड़ी प्रशासनिक इकाई का हिस्सा है, लेकिन भविष्य की योजनाएं इसे रतन शहर पंचायत (Ratan Shahar Panchayat) के साथ विभाजित करने की हैं।

  • विभाजन का कारण: जनसंख्या में वृद्धि के कारण प्रशासनिक कार्यों का दबाव बढ़ गया है।

  • विकास की नई राह: रतन शहर पंचायत के अंतर्गत आने से इस क्षेत्र को नए फंड और स्वायत्तता (Autonomy) मिलेगी।