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झुंझुनूं के भीमसर में विवेकानंद के सबसे बड़े प्रचारक बने डॉ. जुल्फिकार

Jhunjhunu News (झुंझुनू समाचार) : झुंझुनूं के भीमसर में विवेकानंद के सबसे बड़े प्रचारक बने डॉ. जुल्फिकार

झुंझुनूं, राजस्थान के झुंझुनूं जिले के भीमसर गांव के रहने वाले डॉ. जुल्फिकार आज स्वामी विवेकानंद के विचारों के सबसे बड़े प्रचारकों में गिने जा रहे हैं। अल्पसंख्यक समुदाय से होने के बावजूद उन्होंने स्वामी विवेकानंद को अपना जीवन आदर्श बनाया है।

 विवेकानंद पर पीएचडी, पांच पुस्तकें लिखीं

डॉ. जुल्फिकार ने न केवल स्वामी विवेकानंद पर पीएचडी की, बल्कि उनके जीवन और दर्शन पर पांच पुस्तकें भी लिखीं।
वे बताते हैं

विवेकानंद के विचार किसी एक धर्म तक सीमित नहीं, बल्कि मानवता और राष्ट्रनिर्माण की दिशा देते हैं।

 11 साल की उम्र से शुरू हुआ सफर

महज 11 वर्ष की उम्र से वे रामकृष्ण मिशन खेतड़ी के पुस्तकालय जाया करते थे। अखबार पढ़ने से शुरू हुई यह रुचि धीरे-धीरे विवेकानंद साहित्य के गहन अध्ययन में बदल गई।
उनका दावा है कि वे रामकृष्ण मिशन खेतड़ी से पीएचडी करने वाले देश के पहले मुस्लिम युवा हैं।

70,235 विवेकानंद कैलेंडर नि:शुल्क वितरित

पिछले 7 वर्षों से डॉ. जुल्फिकार विवेकानंद संदेश कैलेंडर अभियान चला रहे हैं।
अब तक 70,235 कैलेंडर राजस्थान और दिल्ली के कई जिलों
झुंझुनूं, सीकर, चूरू, जयपुर, बीकानेर, अलवर, हनुमानगढ़ सहित—
सरकारी-गैर सरकारी स्कूलों, मदरसों, वेद विद्यालयों, कॉलेज और विश्वविद्यालयों में वितरित किए जा चुके हैं।

 गांव-ढाणियों में सीधा संवाद

डॉ. जुल्फिकार स्वयं भीमसर, नुआं, सिरियासर, आबूसर, अलसीसर, मलसीसर, टमकोर जैसे गांवों में जाकर युवाओं से संवाद करते हैं।
उनके हाथ में भगवा नहीं, किताबें होती हैं और जुबान पर सिर्फ प्रेरणा

 एक लाख युवाओं तक पहुंचाने का संकल्प

डॉ. जुल्फिकार का लक्ष्य एक लाख युवाओं तक स्वामी विवेकानंद के विचार पहुंचाना है।
विवेकानंद कैलेंडर 2026 सभी धर्मों के प्रति समान आदर, प्रेम और सहिष्णुता का संदेश देता है।

 2020 में हुआ अभियान का शुभारंभ

राष्ट्रीय युवा दिवस 2020 पर नई दिल्ली स्थित RSS मुख्यालय केशव कुंज में विवेकानंद कैलेंडर का विमोचन हुआ।
इस अवसर पर डॉ. इन्द्रेश कुमार सहित कई वरिष्ठ प्रचारक मौजूद थे। तभी से यह अभियान निरंतर जारी है।

 तीन देशों में रहकर किया अध्ययन

डॉ. जुल्फिकार UGC प्रोजेक्ट्स और अंतरराष्ट्रीय सेमिनारों के तहत बांग्लादेश, श्रीलंका और सिंगापुर जा चुके हैं।
उन्होंने बताया कि वे इन देशों के रामकृष्ण मठों में रहकर अध्ययन करने वाले पहले भारतीय मुस्लिम प्रोफेसर हैं।
देश-विदेश के 50 से अधिक रामकृष्ण मठों में रहकर उन्होंने सामाजिक कार्यों का गहन अध्ययन किया।