अब मानसून ने दे दी है दस्तक तो तेरा क्या होगा रे झुंझुनू ? प्रशासनिक व्यवस्था पर उठे सवाल

झुंझुनूं, प्री-मानसून की पहली तेज बारिश ने ही झुंझुनूं नगर परिषद और प्रशासन के मानसून पूर्व तैयारियों के तमाम दावों की हकीकत उजागर कर दी थी। शहर का सबसे व्यस्त गांधी चौक देखते ही देखते तालाब में तब्दील हो गया, जिला कलेक्ट्रेट परिसर में प्रवेश द्वार पर ही पानी भर गया और फरियाद लेकर पहुंचे लोगों को गंदे पानी से होकर अधिकारियों तक पहुंचना पड़ा। दूसरी ओर झुंझुनूं-बगड़ रोड स्थित NH-11 के बीड़ क्षेत्र में कई फीट पानी भरने से घंटों लंबा जाम लगा रहा। शहर की प्रमुख सड़कें नदी जैसी नजर आईं, वाहन रेंगते रहे और आमजन को भारी परेशानी झेलनी पड़ी। विडंबना यह है कि हर साल मानसून से पहले नालों की सफाई, जल निकासी और तैयारियों के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन पहली ही बारिश में पूरा सिस्टम पानी-पानी हो जाता है। बारिश थमने के बाद पानी तो सूख जाता है, लेकिन जिम्मेदारों की जवाबदेही का मुद्दा भी अगली बारिश तक ठंडे बस्ते में चला जाता है। अब मानसून ने दस्तक दे ही दी है तो लोगो को गर्मी से जहा राहत मिली है वही मन अव्यवस्थाओ के आलम के कारण किसी हादसे की संभावना से आशंकित भी है।

खुले नाले और अधूरे गड्ढे बने हादसों की वजह

बारिश के दौरान शहर में कई स्थान हादसों का कारण बने। तीन नंबर रोड पर सड़क पर भरे पानी में वाहन गहरे गड्ढों में फंसते रहे, जबकि पिछले दिनों दो नंबर रोड चौराहे पर खुले पड़े नाले में पानी भर जाने से एक बाइक चालक गड्ढा नहीं देख पाया और बाइक समेत गिरकर घायल हो गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि बिजली, पानी और केबल लाइन बिछाने के बाद सड़कों की सही तरीके से मरम्मत नहीं की जाती। गड्ढों को केवल मिट्टी डालकर छोड़ दिया जाता है। बारिश में यह पता ही नहीं चलता कि सड़क कहां है और गड्ढा कहां, जिससे हर साल दुर्घटनाएं होती हैं।

कलेक्ट्रेट तक में जलभराव, फरियादी पानी में होकर पहुंचे

सबसे शर्मनाक तस्वीर प्री-मानसून की पहली तेज बारिश में जिला कलेक्ट्रेट परिसर से सामने आई। आमतौर पर लोगों की समस्याओं का समाधान करने वाले प्रशासनिक मुख्यालय में ही जल निकासी व्यवस्था पूरी तरह फेल नजर आई। मुख्य द्वार से लेकर अंदर तक पानी भर गया, जिससे शिकायत लेकर पहुंचे लोगों को गंदे पानी से गुजरकर अधिकारियों तक पहुंचना पड़ा। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब जिला मुख्यालय की यह स्थिति है तो शहर के अन्य इलाकों की हालत का सहज अंदाजा लगाया जा सकता है।

नाले सफाई के दावे कागजों में, जमीन पर कचरे का अंबार

नगर परिषद हर वर्ष मानसून से पहले नालों की सफाई पर बड़ा बजट खर्च करने का दावा करती है, लेकिन शहर के अधिकांश मुख्य नाले आज भी पॉलिथीन, गाद और कचरे से अटे पड़े हैं। पीरू सर्किल से तीन नंबर रोड की ओर जाने वाला मुख्य नाला वर्षों से पूरी तरह साफ नहीं हुआ। कई जगह दुकानदारों ने अपने स्तर पर इसे ढक रखा है, जबकि शेष स्थानों पर यह खुला पड़ा है। जलभराव होने पर यही नाला हादसों को न्योता देता है। कई पार्षदों का आरोप है कि नालों की केवल ऊपरी सतह से कचरा निकालकर फोटो खिंचवा ली जाती है, जबकि अंदर जमी गाद की नियमित सफाई नहीं होती। ऐसे में थोड़ी सी बारिश भी पानी निकासी व्यवस्था को ठप कर देती है।

पुराना ड्रेनेज सिस्टम बढ़ती आबादी के सामने बेबस

झुंझुनूं की आबादी लगातार बढ़ रही है, लेकिन शहर का ड्रेनेज सिस्टम वर्षों पुराना ही है। कई वार्ड ऐसे हैं जहां हल्की बारिश में भी जलभराव हो जाता है और कुछ इलाकों में बिना बारिश के भी गंदा पानी गलियों में जमा रहता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि लगातार जलभराव से डेंगू, मलेरिया और अन्य संक्रामक बीमारियों का खतरा बना रहता है। बच्चों और बुजुर्गों को सबसे ज्यादा परेशानी उठानी पड़ती है, लेकिन स्थायी समाधान की दिशा में अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई।

बीड़ क्षेत्र में हर साल जाम, समाधान अब भी अधूरा

NH-11 के बीड़ क्षेत्र में बारिश के दौरान कई फीट पानी भर जाने से वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। घंटों तक यातायात प्रभावित रहा और लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह समस्या नई नहीं है। हर मानसून में यही हालात बनते हैं, लेकिन स्थायी जल निकासी व्यवस्था आज तक विकसित नहीं हो सकी।

अधिकारियों की विजिट, प्रेस नोट और फिर खामोशी

हर वर्ष बारिश शुरू होते ही अधिकारी कुछ स्थानों का निरीक्षण करते हैं, दिशा-निर्देश जारी होते हैं और प्रेस विज्ञप्तियां जारी कर दी जाती हैं। लेकिन धरातल पर इन निर्देशों का कितना पालन होता है, इसकी तस्वीर पहली ही बारिश में सामने आ जाती है।

जनता पूछ रही है सवाल
हर साल नाला सफाई पर खर्च होने वाला बजट आखिर कहां जाता है?
पहली ही बारिश में शहर की सड़कें तालाब क्यों बन जाती हैं?
जिला कलेक्ट्रेट तक में जलभराव रोकने की व्यवस्था क्यों नहीं?
खुले नालों और अधूरे गड्ढों की जिम्मेदारी किसकी है?
NH-11 के बीड़ क्षेत्र की स्थायी समस्या का समाधान आखिर कब होगा?

शहर के प्रमुख जलभराव वाले क्षेत्र :
गांधी चौक
तीन नंबर रोड
दो नंबर रोड चौराहा
जिला कलेक्ट्रेट परिसर
पीरू सर्किल क्षेत्र से तीन न रोड की ओर
NH-11 बीड़ क्षेत्र
राणी शक्ति मंदिर क्षेत्र
खेमी शक्ति मदिर रोड़
हवाई पट्टी क्षेत्र

सेठ मोतीलाल स्टेडियम के पास बरसात का पानी

हवाई पट्टी सर्किल पर बरसात से भरा पानी

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