केंद्र सरकार ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से तैयार होने वाले डीपफेक, फर्जी ऑडियो, वीडियो और टेक्स्ट से उत्पन्न खतरों से निपटने के लिए कानूनी, तकनीकी और नियामक ढांचे को और मजबूत किया है। सरकार का कहना है कि उद्देश्य नागरिकों के लिए सुरक्षित, विश्वसनीय और जवाबदेह साइबर स्पेस सुनिश्चित करना है।
आईटी नियमों में संशोधन से बढ़ी प्लेटफॉर्म की जवाबदेही
सरकार के अनुसार 10 फरवरी 2026 को सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थ दिशानिर्देश एवं डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 में संशोधन किया गया। संशोधन के तहत AI-जनित सामग्री की स्पष्ट लेबलिंग और पहचान योग्य मेटाडेटा उपलब्ध कराना आवश्यक किया गया है, ताकि उपयोगकर्ता कृत्रिम रूप से तैयार की गई सामग्री की पहचान कर सकें।
इसके अलावा सोशल मीडिया मध्यस्थों के लिए गैरकानूनी AI-जनित सामग्री को रोकने, पहचानने और उस पर त्वरित कार्रवाई करने की जिम्मेदारी भी बढ़ाई गई है।
अवैध कंटेंट हटाने की समयसीमा घटाई गई
संशोधित नियमों के तहत सक्षम सरकार या न्यायालय के आदेश के आधार पर गैरकानूनी सामग्री हटाने की समयसीमा 36 घंटे से घटाकर 3 घंटे कर दी गई है। वहीं संवेदनशील मामलों में शिकायतों के निस्तारण की समयसीमा भी कम की गई है, ताकि पीड़ितों को शीघ्र राहत मिल सके।
13 AI परियोजनाओं को मंजूरी
इंडियाएआई मिशन के तहत देशभर के शैक्षणिक संस्थानों में 13 जिम्मेदार AI परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है, जिनमें डीपफेक की पहचान से जुड़ी परियोजनाएं भी शामिल हैं।
दस्तावेज़ के अनुसार, आईआईटी जोधपुर और आईआईटी मद्रास द्वारा विकसित “साक्ष्य” मल्टी-एजेंट फ्रेमवर्क, आईआईटी खड़गपुर की रियल-टाइम वॉयस डीपफेक डिटेक्शन परियोजना तथा ऑडियो-विजुअल जालसाजी पहचान प्रणाली जैसे प्रयास इस दिशा में किए जा रहे हैं।
11.37 लाख लोगों तक पहुंचा जागरूकता अभियान
सरकार ने बताया कि सूचना सुरक्षा शिक्षा एवं जागरूकता (ISEA) परियोजना के तहत देशभर में 6,650 साइबर सुरक्षा जागरूकता कार्यशालाएं आयोजित की गईं, जिनसे 11.37 लाख से अधिक लोग लाभान्वित हुए। इसके अलावा बहुभाषी जागरूकता सामग्री और साइबर सुरक्षा संबंधी सलाह भी विभिन्न माध्यमों से जारी की जा रही है।
लोकसभा में दी गई जानकारी
यह जानकारी केंद्रीय राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने 29 जुलाई 2026 को लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।






