नई दिल्ली। भारतीय रेलवे ने रेल संचालन को सुरक्षित बनाने और रेलवे संपत्ति की रक्षा के लिए अब तक करीब 19,700 किलोमीटर रेलवे ट्रैक के किनारे सुरक्षा बाड़ लगाई है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में बताया कि अनधिकृत प्रवेश रोकने के साथ ट्रेनों पर पत्थरबाजी की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए भी कई स्तरों पर कदम उठाए जा रहे हैं।
रेलवे की ओर से संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान कर निगरानी बढ़ाने, जागरूकता अभियान चलाने और सुरक्षा एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय पर जोर दिया जा रहा है।
पत्थरबाजी करने वालों पर होगी कानूनी कार्रवाई
रेलवे यात्रियों की सुरक्षा और रेलवे संपत्ति को नुकसान से बचाने के लिए ट्रेनों पर पत्थरबाजी करने वालों के खिलाफ संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई करता है।
चिन्हित संवेदनशील क्षेत्रों और ब्लैक स्पॉट पर शराबियों, उपद्रवी तत्वों और अन्य असामाजिक तत्वों के खिलाफ नियमित अभियान भी चलाए जाते हैं। अभियान के दौरान पकड़े गए लोगों पर लागू कानून के अनुसार कार्रवाई की जाती है।
संवेदनशील क्षेत्रों में ट्रेन चालक दल को अलर्ट
रेलवे ने ऐसे स्थानों की पहचान की है जहां ट्रेनों पर पत्थरबाजी या तोड़फोड़ की घटनाएं सामने आती हैं। इन क्षेत्रों में ट्रेन चालक दल और संबंधित कर्मचारियों को विशेष सतर्कता बरतने के लिए जागरूक किया गया है।
घटनाओं का विश्लेषण करने के बाद संबंधित क्षेत्रों में निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया जाता है, ताकि संभावित घटनाओं को रोका जा सके।
‘ऑपरेशन साथी’ के जरिए जागरूकता
रेलवे ट्रैक के आसपास आबादी वाले क्षेत्रों में लोगों को चलती ट्रेन पर पत्थर फेंकने के खतरों के बारे में जागरूक करने के लिए ‘ऑपरेशन साथी’ सहित विभिन्न अभियान चलाए जाते हैं।
इन अभियानों के दौरान लोगों को बताया जाता है कि चलती ट्रेन पर पत्थर फेंकना यात्रियों के जीवन के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है और यह कानूनन अपराध है।
RPF, GRP और स्थानीय पुलिस के बीच समन्वय
पत्थरबाजी की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए रेलवे सुरक्षा बल (RPF), राजकीय रेलवे पुलिस (GRP) और स्थानीय पुलिस के बीच नियमित समन्वय किया जाता है।
सुरक्षा एजेंसियों के बीच महत्वपूर्ण सूचनाएं साझा कर घटनाओं की रोकथाम, संदिग्धों की पहचान और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाता है।
19,700 KM ट्रैक पर सुरक्षा बाड़
रेलवे के अनुसार, रेल परिचालन की सुरक्षा के लिए अब तक करीब 19,700 किलोमीटर ट्रैक के किनारे सुरक्षा बाड़ लगाई जा चुकी है। इसमें बिहार, मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश और उत्तर प्रदेश के रेलवे खंड भी शामिल हैं।
सुरक्षा बाड़ का प्रमुख उद्देश्य ट्रैक क्षेत्र में अनधिकृत प्रवेश को रोकना और रेल परिचालन को अधिक सुरक्षित बनाना है।
सबवे और ट्रैक क्षेत्र में भी सुरक्षा उपाय
रेलवे द्वारा पैदल यात्रियों के लिए बनाए गए सबवे में भी सुरक्षा बाड़ लगाने का काम किया जा रहा है। इसके जरिए मवेशियों, पैदल यात्रियों और छोटे वाहनों की आवाजाही को नियंत्रित करने तथा रेलवे ट्रैक पर अनधिकृत प्रवेश की संभावना कम करने का प्रयास है।
साथ ही सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में राज्य स्तरीय रेलवे सुरक्षा समितियां (SLSCR) गठित हैं। इनकी अध्यक्षता संबंधित राज्य या केंद्र शासित प्रदेश के पुलिस महानिदेशक अथवा पुलिस आयुक्त करते हैं और इनके माध्यम से रेलवे सुरक्षा से जुड़े मुद्दों की समीक्षा तथा संबंधित एजेंसियों के बीच समन्वय किया जाता है।






