राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के बीच नर्मदा अवार्ड के लंबित भुगतान को लेकर वर्षों से चला आ रहा विवाद अब समाप्ति की ओर बढ़ गया है। मंगलवार को केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में चारों राज्यों ने वन-टाइम सेटलमेंट (One-Time Settlement) के तहत ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर किए। राजस्थान की ओर से मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने इस समझौते पर हस्ताक्षर किए।
यह समझौता सरदार सरोवर परियोजना की निर्माण लागत में राज्यों की हिस्सेदारी से जुड़े लंबित वित्तीय विवादों के अंतिम निपटारे की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
सहयोग की भावना से सुलझा वर्षों पुराना विवाद
राज्य सरकार के अनुसार, भारत सरकार के मार्गदर्शन और चारों राज्यों के आपसी समन्वय से नर्मदा नदी से जुड़े लंबे समय से लंबित मुद्दों का समाधान संभव हो सका है। समझौते से नर्मदा नदी के जल का बेहतर और अधिक प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करने का मार्ग भी प्रशस्त होगा।
राजस्थान सरकार ने बताया कि हाल के समय में पार्वती-कालीसिंध-चंबल (एमपीकेसी) परियोजना और हथिणीकुंड बैराज के जल उपयोग को लेकर हुए समझौतों के बाद यह एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि है, जिससे जल संसाधनों के बेहतर प्रबंधन और विकास को गति मिलेगी।
1979 के नर्मदा अवार्ड के प्रावधानों का होगा बेहतर उपयोग
नर्मदा जल विवाद प्राधिकरण ने वर्ष 1979 में दिए गए अवार्ड के तहत राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के बीच जल आवंटन निर्धारित किया था। अवार्ड के क्लॉज IV/5 के अनुसार मानसून के दौरान उपलब्ध अतिरिक्त जल का उपयोग संबंधित राज्य अपने क्षेत्र में कर सकता है और यह जल उसके निर्धारित हिस्से में नहीं जोड़ा जाता।
इसी प्रावधान को ध्यान में रखते हुए राजस्थान सरकार वर्ष 2026-27 की बजट घोषणा के अनुरूप अतिरिक्त मानसूनी जल के भंडारण के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करवा रही है।
पश्चिमी राजस्थान को मिलेगा बड़ा लाभ
राज्य सरकार का कहना है कि अतिरिक्त जल के भंडारण की योजना पूरी होने के बाद पश्चिमी राजस्थान के जल संकट वाले क्षेत्रों को पेयजल उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। इसके साथ ही जल संसाधनों के बेहतर उपयोग से सामाजिक और आर्थिक विकास को भी नई गति मिलने की उम्मीद है।






