कभी वाराणसी में असिस्टेंट कमिश्नर (कॉमर्शियल टैक्स) के तौर पर काम करने वाली निधि तिवारी ने अपने करियर को एक अलग दिशा देने का फैसला किया। उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी की और वर्ष 2013 में ऑल इंडिया रैंक 96 हासिल कर भारतीय विदेश सेवा में जगह बनाई। करीब एक दशक बाद यही सफर उन्हें प्रधानमंत्री कार्यालय तक ले गया। मार्च 2025 में उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्राइवेट सेक्रेटरी नियुक्त किया गया।
यह कहानी सिर्फ एक परीक्षा पास करने की नहीं है, बल्कि एक ऐसे करियर की है जिसमें अलग-अलग क्षेत्रों का अनुभव धीरे-धीरे एक बड़ी जिम्मेदारी की तैयारी बनता गया।
वाराणसी से शुरू हुई कहानी
निधि तिवारी मूल रूप से वाराणसी के महमूरगंज क्षेत्र की रहने वाली हैं। उनकी शुरुआती शिक्षा और आगे की पढ़ाई वाराणसी से जुड़ी रही। उनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि को लेकर प्रकाशित रिपोर्टों में बायोकेमिस्ट्री की पढ़ाई और BHU से गोल्ड मेडल हासिल करने का भी उल्लेख मिलता है।
यानी उनकी कहानी की शुरुआत किसी बड़े सरकारी पद से नहीं, बल्कि पढ़ाई और अपने करियर को लेकर लगातार आगे बढ़ने से हुई।
पहले सरकारी नौकरी, फिर UPSC का फैसला
UPSC में सफलता से पहले निधि तिवारी वाराणसी में असिस्टेंट कमिश्नर (कॉमर्शियल टैक्स) के पद पर कार्यरत थीं। नौकरी के साथ ही उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी की।
यह हिस्सा उनकी कहानी को खास बनाता है।
एक तरफ जिम्मेदार सरकारी नौकरी थी और दूसरी तरफ सिविल सेवा में आगे बढ़ने का लक्ष्य। उन्होंने नौकरी के साथ तैयारी जारी रखी और आखिरकार 2013 की सिविल सेवा परीक्षा में 96वीं रैंक हासिल की।
96वीं रैंक ने बदल दिया करियर
सिविल सेवा परीक्षा में शानदार प्रदर्शन के बाद निधि तिवारी का चयन भारतीय विदेश सेवा यानी IFS में हुआ। वह 2014 बैच की अधिकारी बनीं।
यहां से उनके करियर का फोकस प्रशासन से आगे बढ़कर विदेश नीति, अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक मामलों की ओर जाने लगा।
विदेश मंत्रालय में मिली महत्वपूर्ण जिम्मेदारी
IFS अधिकारी के रूप में निधि तिवारी ने विदेश मंत्रालय में काम किया। रिपोर्टों के अनुसार उन्होंने मंत्रालय के निरस्त्रीकरण और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मामलों के डिवीजन में जिम्मेदारी संभाली।
यह ऐसा क्षेत्र है जहां अंतरराष्ट्रीय संबंधों, सुरक्षा और रणनीतिक मुद्दों की समझ बेहद महत्वपूर्ण होती है।
यहीं से उनके करियर में वह विशेषज्ञता विकसित हुई, जो आगे चलकर प्रधानमंत्री कार्यालय में उनकी भूमिका के लिए उपयोगी साबित हुई।
2022 में PMO पहुंचीं
निधि तिवारी के करियर का अगला बड़ा पड़ाव था प्रधानमंत्री कार्यालय यानी PMO।
नवंबर 2022 में उन्होंने PMO में अंडर सेक्रेटरी के रूप में जिम्मेदारी संभाली। इसके बाद जनवरी 2023 में वह डिप्टी सेक्रेटरी बनीं।
PMO में उनका काम खास तौर पर Foreign and Security से जुड़े मामलों से जुड़ा रहा। उपलब्ध रिपोर्टों में बताया गया है कि इस भूमिका में उन्होंने विदेश मामलों, परमाणु ऊर्जा और सुरक्षा से जुड़े विषयों पर काम किया।
अजीत डोभाल के साथ काम का अनुभव
PMO में अपने कार्यकाल के दौरान निधि तिवारी ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल से जुड़े Foreign and Security वर्टिकल में काम किया। रिपोर्टों के मुताबिक इस दौरान उनकी जिम्मेदारियों में विदेश नीति और सुरक्षा से जुड़े संवेदनशील विषय शामिल रहे।
यही अनुभव उनके करियर का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है, क्योंकि प्रधानमंत्री कार्यालय में काम करने के लिए केवल प्रशासनिक क्षमता ही नहीं, बल्कि जटिल राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों की समझ भी जरूरी होती है।
और फिर आया सबसे बड़ा पड़ाव
29 मार्च 2025 को जारी आदेश के बाद निधि तिवारी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्राइवेट सेक्रेटरी नियुक्त किया गया। नियुक्ति को कैबिनेट की नियुक्ति समिति ने मंजूरी दी थी। उस समय वह PMO में डिप्टी सेक्रेटरी के पद पर कार्यरत थीं।
एक ऐसी अधिकारी, जिसने अपने करियर की शुरुआत एक अलग सरकारी भूमिका से की, UPSC में 96वीं रैंक हासिल की, विदेश सेवा में पहुंचीं, विदेश मंत्रालय में काम किया और फिर PMO में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालते हुए प्रधानमंत्री की निजी सचिव बनीं।
इस कहानी से क्या सीख मिलती है?
निधि तिवारी की कहानी का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा सिर्फ उनका वर्तमान पद नहीं है।
सीख यह है कि करियर हमेशा एक सीधी लाइन में आगे नहीं बढ़ता।
कभी सरकारी नौकरी से शुरुआत होती है, फिर कोई बड़ा लक्ष्य सामने आता है। उसके लिए परीक्षा देनी पड़ती है, नई सेवा में जाना पड़ता है, नए विषय सीखने पड़ते हैं और लगातार खुद को साबित करना पड़ता है।
निधि तिवारी ने भी यही किया—कॉमर्शियल टैक्स से विदेश सेवा तक और विदेश सेवा से प्रधानमंत्री कार्यालय तक।
2013 की UPSC रैंक 96 से शुरू हुआ वह अध्याय आज प्रधानमंत्री कार्यालय की एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी तक पहुंच चुका है।






