नई दिल्ली। प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (PMAY-G) के तहत पिछले पांच वित्तीय वर्षों में राज्यों और संघ राज्य क्षेत्रों को 2.13 करोड़ ग्रामीण आवासों का लक्ष्य आवंटित किया गया। इनमें से 1.95 करोड़ आवास स्वीकृत हुए हैं, जबकि 1.21 करोड़ आवासों का निर्माण पूरा हो चुका है। केंद्रीय ग्रामीण विकास राज्य मंत्री डॉ. चंद्र शेखर पेम्मासानी ने मंगलवार को लोकसभा में लिखित उत्तर में यह जानकारी दी।
सरकार का लक्ष्य ग्रामीण क्षेत्रों में पात्र परिवारों को बुनियादी सुविधाओं से युक्त पक्के घर उपलब्ध कराना है। योजना के तहत 31 मार्च 2029 तक कुल 4.95 करोड़ आवासों के निर्माण में सहायता देने का लक्ष्य रखा गया है।
पांच साल में ₹1.31 लाख करोड़ की केंद्रीय सहायता
ग्रामीण विकास मंत्रालय के अनुसार वित्त वर्ष 2021-22 से 2025-26 के बीच पीएमएवाई-जी के तहत राज्यों और संघ राज्य क्षेत्रों को 1,31,100.02 करोड़ रुपये का केंद्रीय अंश जारी किया गया।
इसी अवधि में केंद्र और राज्यों के अंश को मिलाकर योजना के तहत कुल 2,17,896.40 करोड़ रुपये खर्च किए गए।
पीएमएवाई-जी को ग्रामीण क्षेत्रों में आवास उपलब्ध कराने के उद्देश्य से 1 अप्रैल 2016 से लागू किया जा रहा है। इसके तहत पात्र ग्रामीण परिवारों को बुनियादी सुविधाओं वाले पक्के आवास के निर्माण के लिए सहायता दी जाती है।
राज्यों को 4.18 करोड़ आवासों का लक्ष्य
मंत्रालय के अनुसार वर्तमान में राज्यों और संघ राज्य क्षेत्रों को कुल 4,17,83,017 यानी करीब 4.18 करोड़ आवासों का लक्ष्य आवंटित किया गया है।
राज्यों के लिए आवंटित प्रमुख लक्ष्यों में मध्य प्रदेश को 57.74 लाख, बिहार को 50.12 लाख, पश्चिम बंगाल को 46.69 लाख, महाराष्ट्र को 43.80 लाख और उत्तर प्रदेश को 42.77 लाख आवास शामिल हैं।
इसके अलावा छत्तीसगढ़ को 26.42 लाख और ओडिशा को 28.28 लाख आवासों का लक्ष्य दिया गया है।
74.59 लाख आवास अभी निर्माणाधीन
पिछले पांच वित्तीय वर्षों के आंकड़ों के अनुसार 74.59 लाख पीएमएवाई-जी आवास निर्माणाधीन हैं। इनमें महाराष्ट्र में 20.32 लाख, पश्चिम बंगाल में 11.08 लाख, मध्य प्रदेश में 9.96 लाख, बिहार में 6.75 लाख और असम में 5.82 लाख आवास शामिल हैं।
वहीं उत्तर प्रदेश में 14.69 लाख आवासों का निर्माण पूरा हो चुका है।
अनियमितताओं पर कुछ राज्यों की सहायता रोकी गई
ग्रामीण विकास मंत्रालय ने बताया कि कुछ मामलों में पीएमएवाई-जी के तहत केंद्रीय निधियों को रोका या जारी करने में देरी की गई। यह कार्रवाई उन मामलों में की गई, जहां योजना के क्रियान्वयन में गंभीर अनियमितताओं की जानकारी मिली और संतोषजनक सुधारात्मक कार्रवाई नहीं की गई थी।
ओडिशा में सुधार के बाद फिर शुरू हुई निधि
ओडिशा में योजना के क्रियान्वयन से जुड़ी अनियमितताओं की शिकायतों की राज्य सरकार और मंत्रालय की केंद्रीय टीमों ने जांच की थी। जांच में लाभार्थी चयन, निर्माण गुणवत्ता, निरीक्षण, आवासों की ब्रांडिंग और योजना के दिशा-निर्देशों के पालन से जुड़ी कमियां सामने आईं।
इसके बाद राज्य सरकार को सुधारात्मक और अनुशासनात्मक कार्रवाई के साथ कृत कार्रवाई रिपोर्ट (ATR) प्रस्तुत करने को कहा गया। शुरुआती एटीआर संतोषजनक नहीं पाए जाने पर केंद्रीय सहायता की अगली किस्तें रोक दी गई थीं।
मंत्रालय के अनुसार बाद में ओडिशा सरकार ने आवश्यक सुधारात्मक और अनुशासनात्मक कदम उठाकर संतोषजनक एटीआर प्रस्तुत की। इसके बाद राज्य के लिए पीएमएवाई-जी की निधियां फिर जारी की जाने लगीं।
पश्चिम बंगाल की रिपोर्ट की जांच जारी
पश्चिम बंगाल में नवंबर 2022 में अंतिम रूप दी गई आवास+ 2018 सर्वेक्षण सूचियों के आधार पर लक्ष्य आवंटित किए जाने के बाद पीएमएवाई-जी के क्रियान्वयन में अनियमितताओं से जुड़ी शिकायतें सामने आई थीं।
राष्ट्रीय स्तर की निगरानी टीमों और वरिष्ठ अधिकारियों की टीमों ने शिकायतों का सत्यापन किया। इसके बाद वित्त वर्ष 2022-23 से केंद्रीय अंश जारी करने पर रोक लगाई गई।
मंत्रालय के अनुसार पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा प्रस्तुत कृत कार्रवाई रिपोर्ट की फिलहाल जांच की जा रही है।






