सदर पुलिस पर कलाकारों को थाने बुलाकर धमकाने के आरोप, वरिष्ठ अधिकारी से जांच की मांग
चूरू। सोशल मीडिया कलाकारों से जुड़े एक मामले को लेकर चूरू में विवाद गहरा गया है। राजस्थान इनफ्लुएंसर कम्युनिटी के सदस्यों ने गुरुवार को एसपी कार्यालय पहुंचकर ज्ञापन सौंपा।
ज्ञापन में सदर पुलिस पर सोशल मीडिया क्रिएटर्स को कथित रूप से डराने, धमकाने और मानसिक रूप से प्रताड़ित करने के आरोप लगाए गए हैं। इनफ्लुएंसर कम्युनिटी ने पूरे मामले की वरिष्ठ अधिकारी से निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
कम्युनिटी के ख्याली सहारण और बनवारीलाल गोस्वामी ने ज्ञापन में बताया कि 23 अगस्त 2026 को उनके साथी सोशल मीडिया क्रिएटर ओम ने पाकिस्तान के एक इनफ्लुएंसर अदनान को लेकर टिप्पणी वाली पोस्ट सोशल मीडिया पर साझा की थी।ज्ञापन के अनुसार, कुछ लोगों ने पोस्ट पर आपत्ति जताई।
इसके बाद 24 अगस्त को सदर थाना चूरू से फोन कर पोस्ट हटाने के लिए कहा गया।कम्युनिटी का दावा है कि ओम ने तत्काल पोस्ट हटा दी। इसके बाद माफी मांगने के लिए कहा गया, जिस पर उन्होंने माफी की पोस्ट के साथ बाद में माफी का वीडियो भी जारी किया।
ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि 25 अगस्त को सदर थाना पुलिस के अधिकारी सोशल मीडिया कलाकार अनिल खारिया को उनके घर से थाने ले गए।कम्युनिटी के अनुसार, अनिल बार-बार अपनी गलती पूछते रहे और उन्होंने स्वयं थाने आने की बात भी कही, लेकिन उन्हें कथित तौर पर घर से ही ले जाया गया।इसी दौरान सोशल मीडिया क्रिएटर ओम को भी थाने बुलाया गया।
इनफ्लुएंसर कम्युनिटी ने आरोप लगाया कि दोनों कलाकारों को पुलिस थाने में उनके परिवार और परिचितों के सामने अपमानित किया गया।ज्ञापन के अनुसार, दोनों को सुबह करीब 11 बजे से शाम 7 बजे तक थाने में बैठाकर कथित रूप से मानसिक दबाव बनाया गया और धमकियां दी गईं।
कलाकारों ने आरोप लगाया कि उनका सोशल मीडिया चैनल बंद करवाने तथा एनडीपीएस और आर्म्स एक्ट जैसे गंभीर मामलों में फंसाने की धमकी भी दी गई। राजस्थान इनफ्लुएंसर कम्युनिटी ने पूरे मामले की वरिष्ठ पुलिस अधिकारी से निष्पक्ष जांच करवाने की मांग की है।ज्ञापन में कहा गया कि जांच के दौरान यदि पुलिसकर्मियों पर लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं तो उनके खिलाफ सख्त कानूनी एवं विभागीय कार्रवाई की जाए।
फिलहाल इस मामले में सोशल मीडिया कलाकारों की ओर से लगाए गए आरोप सामने आए हैं। पुलिस की ओर से पूरे घटनाक्रम को लेकर आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है। जांच के बाद ही आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।






