कलेक्टर के 15 दिन के आश्वासन के बाद भी नहीं बदले हालात
झुंझुनूं के बिसाऊ क्षेत्र के टांई गांव में श्मशान घाट जाने वाला रास्ता लंबे समय से गंदे पानी और कीचड़ से बदहाल है। रविवार को एक महिला की अंतिम यात्रा के दौरान ग्रामीणों को ट्रैक्टर-ट्रॉली से शव को पानी और कीचड़ के बीच से ले जाना पड़ा।
इससे जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। झुंझुनूं जिले के बिसाऊ क्षेत्र के टांई गांव से इंसानियत और ग्रामीण सुविधाओं की बदहाली को सामने लाने वाली तस्वीर सामने आई है। रविवार को टांई निवासी सोनिया पत्नी देवकरण स्वामी का असामयिक निधन हो गया।
परिजन और ग्रामीण अंतिम संस्कार के लिए शव को मोक्षधाम ले जाने निकले, लेकिन श्मशान घाट तक पहुंचने वाला मुख्य रास्ता गंदे पानी और कीचड़ से लबालब मिला। रास्ते की हालत ऐसी थी कि पैदल चलना भी मुश्किल था। आखिरकार ग्रामीणों को शव को ट्रैक्टर-ट्रॉली में रखकर घुटनों तक भरे गंदे पानी और कीचड़ के बीच से निकालना पड़ा।
ग्रामीणों के अनुसार श्मशान घाट के रास्ते पर पिछले 11 साल से गंदा पानी जमा है। पानी की निकासी नहीं होने के कारण सड़क पर लगातार कीचड़ और गंदगी बनी रहती है। ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत की ओर से नाला निर्माण पर लाखों रुपये खर्च किए गए, लेकिन घटिया निर्माण और नाले के जाम होने के कारण समस्या का समाधान नहीं हो पाया।
गंदा पानी लंबे समय से जमा रहने के कारण इलाके में सड़ांध की स्थिति बनी हुई है और लोगों को रोजाना आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।ग्रामीणों ने बताया कि वे 9 जून को जिला कलेक्टर से मिलकर समस्या के स्थायी समाधान की मांग कर चुके हैं। उस समय अधिकारियों की ओर से 15 दिन के भीतर समाधान का आश्वासन दिया गया था।ग्रामीणों का कहना है कि आश्वासन के बाद दो महीने से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन मौके पर हालात आज भी जस के तस हैं।
ग्रामीणों ने बताया कि वे समस्या को लेकर प्रभारी मंत्री से लेकर पंचायत स्तर तक कई बार गुहार लगा चुके हैं।ग्राम विकास अधिकारी उम्मेद सिंह ने बताया कि 11 जून को नाले से गाद-कीचड़ हटाने और चैंबर निर्माण के लिए पीडब्ल्यूडी से एनओसी मांगी गई थी, लेकिन अभी तक अनुमति नहीं मिली है।उनके अनुसार पंचायत की ओर से इस कार्य के लिए 6 लाख रुपये की स्वीकृति जारी की जा चुकी है।
एनओसी नहीं मिलने के कारण काम आगे नहीं बढ़ पा रहा है।श्मशान घाट तक जाने वाले रास्ते की यह स्थिति अब ग्रामीणों के लिए सिर्फ आवागमन की समस्या नहीं, बल्कि सम्मानजनक अंतिम यात्रा से जुड़ा सवाल बन गई है।ग्रामीणों का कहना है कि जब किसी व्यक्ति की अंतिम यात्रा भी गंदे पानी और कीचड़ से होकर निकालनी पड़े, तो यह व्यवस्था की संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े करता है। अब ग्रामीण जिला प्रशासन से पूछ रहे हैं कि 15 दिन में समाधान का आश्वासन मिलने के बावजूद दो महीने बाद भी समस्या क्यों नहीं सुलझी? आखिर टांई गांव के श्मशान घाट के रास्ते को कब जलभराव और कीचड़ से स्थायी मुक्ति मिलेगी? ब्यूरो रिपोर्ट झुंझुनू






